मैक्सिको सम्मेलन से भी आस नहीं

जयराम रमेश
Image caption जयराम रमेश को मैक्सिको सम्मेलन में भी समझौते की उम्मीद नहीं है.

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर इस साल होने वाले सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी समझौता होने के आसार कम दिखते हैं.

चीन की यात्रा पर गए जयराम रमेश का कहना था कि चीन और अमरीका ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के स्वैच्छिक लक्ष्य निर्धारित करने को तैयार नहीं हैं इसलिए इस समझौते की राह और कठिन हो गई है.

चीन और अमरीका ग्रीनहाउस गैसों के दो सबसे बड़े उत्सर्जक देश हैं, जबकि भारत इस श्रेणी में पांचवें नंबर पर आता है.

बीज़िंग में जलवायु परिवर्तन पर अपने चीनी प्रतिपक्षी से हुई बातचीत के बाद जयराम रमेश ने पत्रकारों से कहा, “जहां तक बातचीत का सवाल है, सन 2010 तक समझौता हो पाने के आसार न के बराबर हैं. बातचीत में हम किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाए.”

जलवायु परिवर्तन पर इसी साल संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में मैक्सिको में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होने वाला है.

पिछले साल कोपेनहेगन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गैस उत्सर्जन पर कोई समझौता नहीं हो पाया था और इसको लेकर इसकी कड़ी आलोचना हुई थी.

यूरोपीय देशों को ये उम्मीद थी कि अमरीका और चीन बातचीत के दौरान कुछ रियायतें देंगे और लचीला रुख़ अपनाएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

कोपेनहेगन सम्मेलन में भी चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ का तर्क था कि विश्व में सबसे ज़्यादा गीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अमरीका करता है, इसलिए अमरीका को ज़्यादा कटौती करनी चाहिए और ऊर्जा के बेहतर स्रोत्रों के लिए ग़रीब देशों को और पैसा दिया जाना चाहिए.

कई देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि 2050 तक ग्लोबल उत्सर्जन में 50 फ़ीसदी की कटौती का लक्ष्य तय करने में चीन ने बाधा डाली है.

लेकिन अमरीका का ज़ोर इस बात पर रहा कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर बाध्यकारी समझौता हो, जिस पर चीन और अन्य देशों ने विरोध जताया.

हालाँकि कोपेनहेगन जलवायु सम्मेलन के लीक हुए एक दस्तावेज़ के मुताबिक़ सबसे बेहतर समझौते की सूरत में भी धरती के तापमान में बढ़ोत्तरी दो सेल्सियस से कम नहीं हो सकती.

इस दस्तावेज़ में यह भी कहा गया था कि अगर दुनिया के देश अपने बड़े-बड़े वादे भी पूरे करें तो तापमान तीन सेल्सियस बढ़ेगा.

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