डेविड कैमरन ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री

गॉर्डन ब्राउन
Image caption गॉर्डन ब्राउन ने जून 2007 में टोनी ब्लेयर के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला था.

ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने कंज़रवेटिव पार्टी नेता डेविड कैमरन को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है.

इससे पहले गॉर्डन ब्राउन ने घोषणा की थी कि वो प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं.

ब्राउन ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय से मिलने बकिंगघम पैलेस गए और कंज़रवेटिव पार्टी के नेता डेविड कैमरन को अगला प्रधानमंत्री बनाने की सिफ़ारिश की.

इसी के साथ 13 साल से रही लेबर पार्टी की सरकार का कार्यकाल ख़त्म हो गया है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री के सरकारी आवास 10 डॉउनिंग स्ट्रीट के बाहर दिए गए एक बयान में गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठना उनके लिए सौभाग्य की बात रही है.

गॉर्डन ब्राउन का ये फ़ैसला उस वक्त आया जब कंज़रवेटिव और लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टियों के बीच सरकार बनाने को लेकर सहमति बनती नज़र आ रही है.

लेबर पार्टी की कोशिश थी कि वो लिबरल डेमोक्रेट्स के साथ सरकार बनाने को लेकर किसी समझौते पर पहुँचें लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

पिछले हफ़्ते संपन्न हुए ब्रितानी चुनाव में कंज़रवेटिव पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर उभरा था लेकिन उसे अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत नहीं मिल पाया था.

प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा से पहले गॉर्डन ब्राउन ने अपनी पत्नी सारा और नज़दीकी साथी रहे लॉर्ड मैंडलसन, डगलस एलेक्ज़ैंडर, एड बॉल्स और एड मिलीबैंड से विचार विमर्श किया.

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से भी फ़ोन पर बात की.

लेबर पार्टी की नेशनल एक्ज़ेक्युटिव कमेटी ने इशारा दिया है कि वो गॉर्डन ब्राउन के उत्तराधिकारी को जून के अंत तक चुनना चाहेंगे.

गॉर्डन ब्राउन ने जून 2007 में टोनी ब्लेयर के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला था.

एक नज़र ब्राउन पर

कई सालों से गॉर्डन ब्राउन की तमन्ना थी कि वो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनें. तीन साल पहले टोनी ब्लेयर के प्रधानमंत्री पद छोड़ने पर उनकी ये तमन्ना पूरी हुई.

ब्राउन करीब 10 सालों तक ब्रिटेन के वित्त मंत्री रहे. इस दौरान ब्रिटेन में आर्थिक प्रगति का दौर रहा. लेकिन जब वो प्रधानमंत्री बने तो उन्हें भारी आर्थिक मंदी के दौर से जूझना पड़ा.

पिछले वर्ष लंदन में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और आर्थिक मंदी से उबरने के लिए लाए गए बेलआउट प्लान को लेकर उनकी प्रशंसा हुई.

लेकिन कई बातों को लेकर उनकी भारी आलोचना भी हुई. चुनाव प्रचार के दौरान एक टिप्पणी को लेकर हुई आलोचना इसका ताज़ा उदाहरण है.

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