लेबर पार्टी के हार मानने के संकेत

ब्रिटेन में तीन प्रमुख पार्टियों के नेता
Image caption तीनों पार्टियों के नेता गठबंधन सरकार के लिए रस्साकशी कर रहे हैं

ब्रिटेन में एक गठबंधन सरकार के गठन के लिए तीनों प्रमुख दलों में सघन बातचीत के बाद सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के हार मानने के संकेत मिल रहे हैं.

प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के एक निकट सहयोगी ने बीबीसी को बताया है कि लेबर पार्टी सत्ता में रहने के प्रयासों में पीछे हटने के लिए तैयार होती नज़र आ रही है.

बीबीसी संवाददाता निक रॉबिन्सन को पता चला है कि लिबरल डैमोक्रेट पार्टी ने गठबंधन सरकार के लिए कंज़रवेटिव पार्टी को समर्थन देने का फ़ैसला कर लिया है और लेबर पार्टी खुद को अब एक प्रगतिशील पार्टी के रूप में फिर से संगठित करने की कोशिश करेगी.

लेबर पार्टी के इस फ़ैसले के बाद अब लिबरल डैमोक्रेट पार्टी के समर्थन से कंज़रवेटिव पार्टी की सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो जाएगा और डेविड कैमरॉन अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं.

हालाँकि ताज़ा समाचार मिलने तक लिबरल डैमोक्रेट और कंज़रवेटिव पार्टी के नेताओं के बीच कैबिनेट ऑफ़िस में सघन बातचीत चल रही थी. इस बीच डेविड कैमरॉन ने कह दिया है कि चुनाव सुधार जैसे सबसे विवादास्पद मुद्दे पर कंज़रवेटिव पार्टी जनमत संग्रह कराने के लिए तैयार है.

प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता गॉर्डन ब्राउन ने सोमवार को घोषणा की थी कि गठबंधन सरकार के गठन का रास्ता साफ़ करने के लिए वो पद से हट जाएंगे. बाद में लेबर पार्टी और लिबरल डैमोक्रेट पार्टी के बीच ठोस बातचीत का रास्ता खुलने की उम्मीद जताई गई थी.

लेकिन प्रधानमंत्री की उस घोषणा के बाद लिबरल डैमोक्रेट्स और सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने वाली कंज़रवेटिव पार्टी के बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई है. इन दोनों दलों के बीच पिछले कुछ दिनों से गहन बातचीत चल रही थी.

इसलिए दिन बीतने के साथ ही ब्रिटेन में राजनीतिक घटनाक्रम नाटकीय होता जा रहा है और राजनेता गठबंधन सरकार के गठन के लिए अब भी अपने-अपने पत्ते आज़मा रहे हैं.

हालाँकि वैचारिक तौर पर लेबर और लिबरल डैमोक्रेट्स पार्टियाँ गठबंधन सरकार बनाने के लिए ज़्यादा नज़दीक नज़र आती हैं लेकिन सोमवार को गॉर्डन ब्राउन की घोषणा के बाद राजनीतिक पैंतरेबाज़ी बदलती नज़र आ रही है.

लेबर पार्टी के नेताओं को पार्टी को इस मुद्दे पर राज़ी करने में ख़ासी मशक्कत करनी पड़ रही है कि इस समय सत्ता में बने रहना या हट जाना समझदारी होगी या घाटे का सौदा.

इसलिए सबका ध्यान एक बार फिर से लिबरल डैमोक्रेट्स और कंज़रवेटिव पार्टी के बीच हो रही बातचीत पर केंद्रित हो गया है.

लेकिन पिछले एक-दो दिन में जिस तरह से घटनाक्रम तेज़ी से बदल रहा है, इस राजनीतिक पैंतरेबाज़ी में कुछ भी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.

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