'नेटो गठबंधन में सुधार ज़रूरी'

मैडलिन ऑलब्राइट और एंडर्स फ़ो रैज़मुसैन
Image caption अगर नेटो अपनी उपलब्धियों को उजागर नहीं करेगा तो उसे सार्वजनिक समर्थन नहीं मिलेगा.

अगर नेटो 21 वीं शताब्दी में अपने दायित्वों को निभाने में प्रभावी बना रहना चाहता है तो उसमें सुधार ज़रूरी है.

ये कहना है विशेषज्ञों के उस दल का जिसका नेतृत्व अमरीका की भूतपूर्व विदेश मंत्री मैडलिन ऑलब्राइट ने किया.

सोमवार को ब्रसेल्स स्थित नेटो के मुख्यालय में इस दल ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें कहा गया कि नेटो को अपनी क्षेत्रीय सीमाओं से परे भी कार्रवाई करने की क्षमता बनाए रखना चाहिए.

नेटो की नवंबर में होने वाली शिखर बैठक में नई सामरिक नीति पर सहमति होनी है.

रिपोर्ट के अंत में इस दल ने चेतावनी दी है कि अगर नेटो अपनी उपलब्धियों को उजागर नहीं करेगा तो उसे सार्वजनिक समर्थन नहीं मिलेगा.

बीबीसी के प्रतिरक्षा संवाददाता निक चाइल्ड्स कहते हैं कि नेटो के भीतर इस बात को लेकर काफ़ी तनाव रहा है कि उसे दूर दराज़ के इलाक़ों में जाने की ज़रूरत है या अपनी सीमाओं के आस पास ही रहना चाहिए.

लेकिन रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान को लेकर नेटो की वचनबद्धता को रेखांकित किया गया और कहा गया कि नेटो को दुनिया भर के ख़तरों से रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए.

नेटो का गठन

नेटो का गठन 4 अप्रैल 1949 में सदस्य देशों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया था.

तब दुनिया दो ख़ेमों में बंटी हुई थी. एक तरफ़ कम्युनिस्ट देश थे और दूसरी तरफ़ पश्चिमी देश. लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं.

शीत युद्ध समाप्त हुए अरसा बीत गया है. यही नहीं वॉरसा संधि रद्द हो चुकी है और उसके बहुत से देश अब नेटो के सदस्य हैं.

इसलिए नेटो की भूमिका पर अकसर सवाल उठते रहे हैं.

नई चुनौतियां

रिपोर्ट में कहा गया है कि नेटो की पिछली सामरिक समीक्षा के बाद से दुनिया काफ़ी बदल गई है.

हालांकि नेटो पहले से अधिक व्यस्त है लेकिन उसकी उपयोगिता का अंदाज़ा कम लोगों को है.

रिपोर्ट के अनुसार नेटो नेताओं को इस अवसर का इस्तेमाल करके नई रणनीति बनानी चाहिए जिससे सुरक्षा और स्थिरता में नेटो के योगदान को उजागर किया जा सके.

अमरीका की भूतपूर्व विदेश मंत्री मैडलिन ऑलब्राइट ने कहा, "नेटो को बहुउपयोगी और अपने इलाक़े से दूर भी काम करने में सक्षम होना चाहिए".

सोमवार को हुए प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीमती ऑलब्राइट और नेटो के महासचिव एंडर्स फ़ॉग रैज़मसैन ने कहा कि यूरोप और उत्तरी अमरीका की जनता को यह बताना ज़रूरी है कि नेटो के अभियानों में जो संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है वह उपयोगी है.

अफ़ग़ानिस्तान में चल रही लड़ाई नेटो के लिए सबसे बड़ा और ख़तरनाक मिशन रहा है.

नेटो के भीतर रूस से संबंध को लेकर भी मतभेद हैं. कुछ देश रूस से रिश्ते बेहतर करना चाहते हैं जबकि मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ नए सदस्य देशों में रूस के इरादों को लेकर गहरी शंका बनी हुई है.

रिपोर्ट कहती है कि मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली को यूरोप में लागू करने की योजना के बारे में रूस को साथ लेकर चलना चाहिए.

रिपोर्ट कहती है कि नेटो को संतुलन बनाकर रखना है जिससे रूस के साथ सहयोग हो साथ ही नेटो के सदस्य देशों को यह आश्वासन मिले कि उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा की जाएगी.

आधुनिक दुनिया की जटिलताओं को देखते हुए नेटो को आतंकवाद, साइबर हमलों और परमाणु और अन्य हथियारों की टेक्नॉलॉजी के प्रसार के ख़तरों से भी जूझना होगा.

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