थाइलैंड में मध्यस्थता पर सहमति नहीं

थाइलैंड

थाइलैंड में अधिकारियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता की मांग को ठुकरा दिया है.

इससे पहले सरकार ने इन प्रदर्शनकारियों से कहा था कि वे सोमवार दोपहर तक बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं से कैंप खाली करने को कह दें.

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा का इस्तीफ़ा मांग रहे ये प्रदर्शनकारी मार्च से ही राजधानी बैंकॉक में डेरा डाले हुए हैं.

प्रदर्शनकारी कई हफ़्ते से राजधानी बैंकॉक में डेरा डाले हुए हैं और उनकी शर्त है कि पहले मोर्चों पर तैनात सेना को वापस बुलाया जाए और बातचीत में संयुक्त राष्ट्र को मध्यस्थ बनाया जाए.

प्रदर्शनकारियों के एक नेता नत्तावुत सैकियू का कहना था,''यदि सरकार युद्ध- विराम की घोषणा करती है और सैनिकों को वापस बुलाती है तो लाल कुर्तीधारी समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत को तैयार हैं. हम तत्काल वार्ता करना चाहते हैं लेकिन हमारी मांग है कि बातचीत संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हो.''

लेकिन सरकार ने फ़िलहाल विरोधियों की इस पेशकश को ठुकरा दिया है.

थाइलैंड में टेलिविज़न चैनलों पर औरतों और बच्चों को प्रदर्शन स्थल छोड़ते हुए दिखाया गया है.

चेतावनी

सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि प्रदर्शनकारी 24 घंटे के अंदर शिविर खाली कर दें.

सरकार ने रेड क्रॉस से भी कहा है कि वो लोगों को शिविर खाली करने के लिए प्रेरित करें.

रेड शर्ट कहलाने वाले इन प्रदर्शनकारियों के कैंप के बाहर रेत की बोरियां लगाकर सैनिकों ने मोर्चेबंदी की है और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वो गोलियां भी चला रहे हैं.

सैनिकों के साथ झड़प में अब तक कम से कम 29 लोग मारे जा चुके हैं और प्रदर्शनकारियों के एक नेता का कहना है कि देश “गृह-युद्ध” के करीब है.

प्रधानमंत्री अभिसीत विजयजीवा ने शनिवार को सरकारी टेलीविज़न पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार पीछे नहीं हटेगी और प्रदर्शनकारियों को भगा कर ही दम लेगी.

उनका कहना था कि बल प्रयोग के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है.

सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में ग्रेनेड हमले भी किए गए हैं. सेना ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया है.

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