ईरान के ख़िलाफ़ और प्रतिबंधों पर 'सहमति'

हिलैरी क्लिंटन
Image caption हिलेरी ने और प्रतिबंधों पर सहमति की घोषणा सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सामने की

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ और ज़्यादा प्रतिबंध लगाने के एक नए प्रस्ताव पर प्रमुख शक्तिशाली देशों के बीच सहमति हो गई है.

हिलेरी क्लिंटन ने अमरीकी सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सामने मंगलवार को कहा कि इस आशय के प्रस्ताव का मसौदा मंगलवार को ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों में बाँटा जाएगा.

हिलेरी क्लिंटन की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही ईरान, ब्राज़ील और तुर्की के बीच परमाणु ईंधन की अदला-बदली के बारे में समझौता हुआ है.

इन तीनों देशों का कहना है कि इस समझौते के बाद अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर उसके ख़िलाफ़ और प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत ही नहीं रह जाती है.

इस समझौते में व्यवस्था है कि ईरान अपने असैनिक परमाणु कार्यक्रम की ज़रूरत पूरी करने के लिए यूरेनियम संवर्धन के लिए तुर्की भेजेगा. यूरोपीय देशों का यह प्रस्ताव था कि ईरान अगर विदेशों में अपना यूरेनियम संवर्धन के लिए भेजे तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ दूर हो जाएंगी.

लेकिन तुर्की और ब्राज़ील के साथ ईरान के इस समझौते का समाचार अमरीका और उसके सहयोगी देशों में ज़्यादा गर्मजोशी के साथ स्वीकार नहीं किया गया.

हिलेरी क्लिंटन ने मंगलवार को कहा कि ईरान, तुर्की और ब्राज़ील के बीच इस समझौते के बारे में अब भी बहुत से प्रश्न अनुत्तरित बचे हैं.

तुर्की के प्रधानमंत्रई रिसेप तैयब अर्दोगान ने विश्व समुदाय का आह्वान किया है कि इस समझौते को समर्थन दें.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वादे के अनुसार ईरान ने अगर एक महीने के भीतर यूरेनियम संवर्धन के लिए नहीं भेजा, तो वो हालात के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार होगा.

ईरान पर दबाव

हिलेरी क्लिंटन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों अमरीका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस के बीच बातचीत के बाद सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सामने कहा, "रूस और चीन के सहयोग से हम एक मज़बूत प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं."

अमरीका और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरान का कहना है कि वो कोई परमाणु हथियार नहीं बना रहा है बल्कि देश में ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए असैनिक परमाणु कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

समाचार एजेंसी एपी ने कहा है कि ईरान पर नए प्रतिबंधों का ज़्यादा विवरण तो नहीं जारी किया गया है लेकिन ऐसी संभावना है कि इनके ज़रिए ईरानी अधिकारियों और संस्थानों पर आर्थिक जुर्माना का दायरा बढ़ाया जाएगा.

रूस और चीन इससे पहले तक ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों का विरोध करते रहे हैं.

तुर्की के साथ समझौते का हवाला देते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ईरान सरकार इस तरह के तरीक़ों से प्रमुख देशों का दबाव हटाने की कोशिश कर रहा है.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "हम नहीं समझते कि यह सिर्फ़ कोई संयोग हो सकता है कि जब हम न्यूयॉर्क में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे तभी ईरान का तुर्की के साथ ये समझौता हुआ."

उन्होंने कहा, "सच बात ये है कि हमने रूस और चीन को साथ ले लिया है और इस सप्ताह के आरंभ में ही प्रस्ताव के मसौदे पर बातचीत होने की यह प्रगति हो गई थी जिससे ईरान पर दबाव बढ़ा है जिसे ईरान सरकार किसी भी तरह कम करने की कोशिश में लगी थी."

हालाँकि चीन के विदेश मंत्री याँग जियेची ने कहा है कि वह ईरान और तुर्की के बीच परमाणु ईंधन की अदला बदली के समझौते को देखकर उत्साहित हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीनी विदेश मंत्री के इस वक्तव्य से यह संकेत मिलता है कि विश्व की महाशक्तियाँ इस बात पर भिन्न राय रख सकती हैं कि ईरान पर प्रतिबंधों का कितना दबाव बनाया जाए.

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