कई तमिल विद्रोहियों का एक-साथ विवाह होगा

तमिल विद्रोही
Image caption लगभग एक साल पहले युद्ध में हार के बाद कई विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए थे

श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई में रह चुके लड़ाकों के पुनर्वास के ज़िम्मेदार एक सैन्य अधिकारी ने कहा है कि वो 20 लड़ाकों के एक साथ विवाह कि योजना बना रहे हैं.

पुनर्वास योजना के प्रमुख ब्रिगेडियर सुदांथा रानासिंघे का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जून के मध्य मे होने वाले समारोह मे लगभग 20 जोड़े शामिल होंगे.

ब्रिगेडियर रानासिंघे ने बीबीसी को बताया कि इन जोड़ों के रिश्ते युद्ध ख़त्म होने से पहले के हैं. एलटीटीई में पुरुष और महिलाएँ साथ-साथ काम करते थे.

लगभग एक साल पहले श्रीलंका के उत्तर मे तमिल विद्रोहियों की अपने ही गढ़ मे पराजय हुई थी.

पुनर्वास केन्द्र

ब्रिगेडियर रानासिंघे ने बीबीसी को बताया कि इससे पहले उन जोड़ों ने औपचारिक तौर पर शादी नहीं की थी बल्कि केवल ज़ुबानी ही एक दूसरे को वचन देकर उसे शादी मान लिया था.

ब्रिगेडियर रानासिंघे ने कहा कि प्रशासन इस योजना के लिए इन पुरुषों, महिलाओं और इनके माता-पिता से सहमति हासिल करेगा.

Image caption श्रीलंका में युद्ध के कारण तमिल का ख़ासा इलाक़ा विद्रोहियों से युद्ध के बाद से मची तबाही

ब्रिगेडियर रानासिंगे ने ये भी स्वीकार किया कि हो सकता है लड़ाई के वर्षों के दौरान कुछ जोड़ों की स्थिती बदल गई हो. उनका कहना था कि हो सकता है कि महिला अब कहे कि 'मैं अब उस आदमी के साथ नहीं रहना चाहती' या फिर ऐसे जोड़ों में से कोई पुरुष भी ऐसा कह सकता है.

युद्ध के अंत मे 10 हज़ार पूर्व विद्रोहियों में पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग कर कैपों या पुनर्वास केंद्रों में भेज दिया गया था.

ब्रिगेडियर रानासिंघे ने कहा कि इन जोड़ों को हफ़्ते में एक बार एक दूसरे से मिलने की इज़ाज़त है.

क़ानूनी तौर पर शादी हो जाने के बाद उन्हें उत्तरी शहर जाफ़ना के केंद्र में भेजा जाएगा, जहाँ परिवार रहते हैं और उनमें से कई अपने बच्चों के साथ रहते हैं.

सरकार का कहना है कि हर केंद्र में पूर्व विद्रोहियों के 500 परिवार रहते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के मक़सद से आम जिदंगी के तौर तरीके सिखाए जा रहे हैं.

सरकार का कहना है कि इनमें से कुछ एक लोगों पर ही मुकदमे चलेंगे, अन्य को एक साल के भीतर छोड़ दिया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि पूर्व टाईगर विद्रोहियों की हिरासत कानूनी नहीं है. मानवाधिकार संगठनों की मांग है कि जिन लोगों पर मुक्दमे नहीं हैं उन्हे तुरंत रिहा किया जाए.

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