तालेबान को 'फ़र्स्ट एड' की ट्रेनिंग

आईसीआरसी
Image caption पहली बार तालेबान लड़ाकों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति यानी आईसीआरसी का कहना है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के सदस्यों को फ़र्स्ट एड यानी प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी है.

आईसीआरसी ने अपने बयान में कहा है कि उसने पिछले महीने तालेबान के 'शस्त्र विरोधी समूह' के लगभग 70 सदस्यों को प्राथमिक उपचार करने की बुनियादी ट्रेनिंग दी है.

आईसीआरसी का कहना है कि उसने कुछ आम नागरिकों को भी इस तरह का प्रशिक्षण दिया है.

समिति के प्रवक्ता का कहना है कि यह ट्रेनिंग इसलिए दी जा रही है ताकि प्रत्येक व्यक्ति के साथ मानवीय व्यवहार को सुनिश्चित किया जा सके.

प्रवक्ता का कहना है कि आईसीआरसी के संविधान के अनुसार युद्ध की मार झेल रहे सभी पक्षों को न्यायसंगत सहायता मिलनी चाहिए.

'नियमित कार्य'

उनका कहना है कि आईसीआरसी का सैन्य दल और उसके विरुद्ध लड़ रहे बंदूकधारियों को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग देना 'नियमित' कार्य है और ऐसी ट्रेनिंग श्रीलंका के युद्ध क्षेत्रों में भी दी गई थी.

उधर काबुल में नेटो के प्रवक्ता ने कहा है कि गठबंधन सेना आईसीआरसी के ज़रिए किए जा रहे मानवीय कार्य का सम्मान करता है. उनका कहना था कि ऐसा काम बिना किसी भेद भाव के होना चाहिए.

आईसीआरसी के प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया है कि ज़ख़्मी लोगों के इलाज करने के साथ-साथ तालेबान लड़ाके को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग देने से युद्ध क्षेत्र की महत्वपूर्ण विभाजन रेखा पर कोई असर पडे़गा.

आईसीआरसी के प्रवक्ता ने अपने मक़सद को स्पष्ट करते हुए कहा,"हमारा मक़सद उन लोगों की सहायता करना है जिन्हें अधिक मदद की ज़रूरत है. इससे यह फ़र्क नहीं पड़ता कि कौन, किसकी तरफ़ से है."

वो आग कहते हैं, "एक निष्पक्ष संगठन होने के नाते नस्ल या राजनीति का भेद किए बिना हम लोग चिकित्सीय आवश्यकता के मुताबिक़ लोगों का इलाज करते हैं और ट्रेनिंग देते हैं."

अफ़ग़ानिस्तान में इस समय आईसीआरसी के हज़ारों कर्मचारी तैनात हैं और लोगों को मदद पहुंचाने के काम पर लगे हुए हैं.

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