समलैंगिक सैनिक धड़ल्ले से करेंगे नौकरी

Image caption अमरीकी फ़ौज में समलैंगिक अपनी असलियत सामने नहीं ला सकते.

अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स ने सेना में समलैंगिकों के मामले में अपनी नीति में बदलाव किया है.

अमरीकी सेना में अब तक 'डोंट से, डोंट आस्क' की नीति लागू थी यानी 'न पूछो, न बताओ' लेकिन अब अमरीकी सेना में समलैंगिकों को यह बात छिपाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

इसे समलैंगिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता एक बड़ी जीत मान रहे हैं, राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इस बदलाव का वादा किया था.

इस बदलाव की घोषणा होने पर संसद की दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाकर और शोर मचाकर फ़ैसले का स्वागत किया.

राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में समलैंगिकों को सेना में नौकरी करने की अनुमति मिली थी लेकिन शर्त यही थी कि उन्हें अपनी समलैंगिकता की बात छिपाकर रखनी होगी.

अब तक नौकरी की शर्तों में यह बात भी शामिल रही है कि अगर किसी के समलैंगिक होने की बात ज़ाहिर हो जाए तो उसकी नौकरी छिन सकती है.

इस नीति के विरोधियों का कहना था कि यह नागरिक समानता और स्वतंत्रता के बुनियादी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है इसलिए इसे बदला जाना चाहिए.

इस बदलाव के क़ानून बनने में अभी समय लगेगा क्योंकि इसे सीनेट की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है, इसके अलावा अमरीकी रक्षा मंत्रालय को इस बात की समीक्षा करनी है कि इस बदलाव को व्यावहारिक स्तर पर किस तरह लागू किया जा सकेगा.

विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि संसद को रक्षा मंत्रालय की समीक्षा से पहले कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए, रक्षा मंत्रालय को इस नीति के व्यावहारिक पक्षों की समीक्षा करने में दिसंबर तक का समय लगेगा.

ऐसा माना जा रहा है कि अगले साल ही नई नीति अमल में आ सकेगी जब अमरीकी सेना में समलैंगिकों को छिपकर नहीं रहना होगा.

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