वेतन के मुक़ाबले से बाज़ आएं!

भारतीय रुपए
Image caption 'देख पराई चूपड़ी मत ललचावे जी'

यूरोप में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक़ दूसरों से अपनी आमदनी का मुक़ाबला करने वाले लोग ख़ुश नहीं रहते.

यूरोप के देशों में किए गए एक सर्वेक्षण में 75 प्रतिशत लोगों ने माना कि दूसरों की आमदनी से मुक़ाबला करना उनके लिए महत्वपूर्ण है.

लेकिन शोध के मुताबिक़ यदि ये लोग अपने वेतन का मुक़ाबला अपने सहकर्मियों की जगह दोस्तों और परिवार वालों के वेतन से करते हैं तो वे असंतुष्ट हो जाते हैं.

इक्नॉमिक जर्नल नाम की पत्रिका में छपे इन नतीजों में देखा गया है कि निर्धन वर्ग के लोगों पर आमदनी के मुक़ाबले का सबसे ज़्यादा असर पड़ता है.

पेरिस स्कूल ऑफ इक्नॉमिक्स के शोधकर्ताओं ने यूरोप के 24 देशों के 19 हज़ार लोगों पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर ये नतीजे निकाले हैं.

सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने पाया कि अपनी आमदनी का दूसरों की आमदनी से मुक़ाबला करने वाले लोग अपने को कमतर समझने लगते हैं और अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं.

अपने सहयोगियों की आमदनी से मुक़ाबला कम दुखदाई रहता है जबकि अपने मित्रों और संबंधियों की आमदनी की तुलना अपनी आमदनी से करना बेहद दुखदाई हो जाता है.

सर्वेक्षण में इसका नतीजा ये निकाला गया कि सहयोगियों का वेतन ज्यादा है तो कहीं न कहीं भावी तरक्क़ी का ख़याल सांत्वना दे देता है.

अमीर देशों के मुक़ाबले ग़रीब देशों के लोगों में आमदनी की तुलना का ये चलन ज़्यादा देखा गया.

अध्ययन दल के प्रमुख प्रोफ़ैसर एंड्रू क्लार्क इस नतीजे पर हैरानी जताते हैं, "मैं ये समझता था कि वेतन की तुलना का चलन अमीर लोगों में ज़्यादा होता होगा, क्योंकि ग़रीब के लिए तो अपनी ज़रूरतें पूरी करना ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन नतीजों में ऐसा नहीं देखा गया."

ब्रिटेन के लैंकैस्टर विश्वविद्यालय में संस्थागत मनोविज्ञान और स्वास्थ्य के विशेषज्ञ प्रोफ़ैसर कैरी कूपर का कहना है कि जो लोग हमेशा अपनी आमदनी की तुलना दूसरों से करते हैं वह अपने बारे में आश्वस्त नहीं होते.

प्रोफैसर कूपर का ये मानना है कि अपने स्कूल या विश्वविद्यालय के मित्रों के वेतन से तुलना करना ज़्यादा नुक़सानदेह है, "दफ़्तर के अपने सहयोगियों के साथ ये मुक़ाबला न्यायोचित है लेकिन अपने स्कूल के दोस्त अगर समान अवसरों के बावजूद तरक्क़ी कर जाएं तो आप यही सोचेंगे कि उनमें आप से ज़्यादा क़ाबिलियत है."

कूपर एक सलाह देते हैं, "हमेशा दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने वालों को मैं ये सलाह देता हूं कि वे ऐसा करना छोड़ दें और अपने आप में मस्त रहें, याद रहे कि आप जिन लोगों से तुलना कर रहे हैं, हो सकता है कि वे आप से ज़्यादा सुखी न हों."

संबंधित समाचार