मलावी समलैंगिकों को आम माफ़ी

मलावी में दो समलैंगिकों को आम माफ़ी
Image caption इन समलैंगिकों को दिसंबर 2009 में गिरफ़्तार किया गया था और अदालत ने 14 वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई थी

मलावी के राष्ट्रपति बिंगू वा मुथारिका ने उन दो समलैंगिकों को आम माफ़ी दे दी है जिन्हें आपस में ही सगाई करने और उसका समारोह करने के आरोप में पिछले सप्ताह 14 वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

राष्ट्रपति ने कहा है कि इन समलैंगिकों ने आपस में ही सगाई करके मलावी की संस्कृति, धर्म और क़ानूनों के ख़िलाफ़ अपराध किया है लेकिन उन्हें मानवीय आधार पर आम माफ़ी दी जा रही है.

इस मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी और मलावी के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के साथ देश में ही मुलाक़ात के बाद आम माफ़ी देने की घोषणा की है.

इन दोनों समलैंगिकों की तुरंत रिहाई के भी आदेश दिए गए हैं.

26 वर्षीय स्टीवन मोंजेज़ा और 28 वर्षीय टी चिम्बालंगा ने इस महीने को अनुपयुक्त सामाजिक बर्ताव करने और अप्राकृतिक कृत्य करने के लिए 14 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी.

उन्हें समलैंगिकता के आरोप में दिसंबर 2009 में गिरफ़्तार किया गया था और तभी से वो जेल में बंद रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अब इन दोनों समलैंगिकों को आम माफ़ी देने के राष्ट्रपति के फ़ैसले को साहसिक क़दम क़रार दिया है.

बान की मून ने कहा, "इस दंड प्रक्रिया संहिता में सुधार किया जाना चाहिए, यह जहाँ भी मौजूद है."

सुधार की बात

बीबीसी संवाददाता कैरेन ऐलेन का कहना है कि बान की मून मलावी के सांसदों पर दंड प्रक्रिया संहिता के समलैंगिकता संबंधी प्रावधानों में बदलाव करने के लिए दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं. इन प्रावधानों के बारे में कहा जाता है कि वो सदियों पुराने हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि मलावी एक बहुत ही परंपरागत देश है जहाँ धार्मिक नेता पुरुष-पुरुष के बीच और महिला-महिला के बीच यौन संबंधों की तुलना शैतानियत से करते हैं. धार्मिक संदर्भ में शैतान को बहुत बुरा समझा जाता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मलावी में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इन दोनों समलैंगिकों के जेल जाने पर बिल्कुल भी दुखी नहीं हैं और ऐसे लोगों को राष्ट्रपति की इस घोषणा पर अचंभा ज़रूर होगा.

संबंधित समाचार