इसराइल ने परमाणु वार्ता योजना को ठुकराया

बिन्यामिन नेतनयाहू
Image caption इसराइल इस बात पर टिप्पणी नहीं करता कि उसके पास परमाणु हथियार हैं या नहीं

इसराइल का कहना है कि वो मध्यपूर्व को परमाणु हथियार रहित क्षेत्र बनाने के लिए होने वाले सम्मेलन में भाग नहीं लेगा.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में कोई 200 देशों ने 2012 में इस तरह का सम्मेलन कराए जाने पर सहमति व्यक्त की. इन सभी देशों ने परमाणु अप्रसार संधि या एनपीटी पर हस्ताक्षर कर रखे हैं.

इस बैठक में जिस प्रस्ताव पर सहमति बनी उसमें इसराइल की आलोचना की गई है.

उल्लेखनीय है कि इसराइल ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. उसने इस प्रस्ताव को ‘दोषपूर्ण’ और ‘पाखंडपूर्ण’ बताया है.

इसराइली सरकार ने कहा, “ये प्रस्ताव मध्यपूर्व की असलियत और इस क्षेत्र और समूचे विश्व के सामने खड़े ख़तरों की उपेक्षा करता है”.

कनाडा की यात्रा पर गए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने वक्तव्य में कहा कि ऐसी स्थिति में इसराइल इस प्रस्ताव के लागू होने में हिस्सेदार नहीं होगा.

इससे पहले भी इसराइली सरकार उन अफ़वाहों पर टिप्पणी करने से इंकार कर चुकी है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं.

'निरर्थक प्रस्ताव'

परमाणु अप्रसार संधि को सशक्त बनाने के लिए एक महीने तक चले सम्मेलन के बाद 28 पृष्ठों के एक दस्तावेज़ पर 189 देशों ने सहमति व्यक्त की.

इस दस्तावेज़ में इसराइल से एनपीटी पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया गया लेकिन इसमें ईरान का कोई ज़िक्र नहीं था. जबकि यह संदेह किया जाता है कि ईरान का अपना परमाणु अस्त्र कार्यक्रम है.

विश्लेषकों का कहना है कि यह ईरान के लिए निश्चय ही एक कूटनीतिक विजय रही जो कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और परमाणु हथियार बनाने का उसका कोई इरादा नहीं है.

हालांकि इस दस्तावेज़ पर अमरीका ने भी सहमति व्यक्त की लेकिन साथ ही राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चेतावनी दी कि वो इसराइल को निशाना बनाए जाने से सहमत नहीं हैं.

उन्होने कहा, "हम इसराइल को निशाना बनाने की कोशिशों का कड़ा विरोध करते हैं और इसराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने वाले किसी भी क़दम का विरोध करेंगे".

इसराइल के विदेश उपमंत्री डैनी अयालॉन ने वचन दिया कि अमरीका के साथ उनके देश का सहयोग जारी रहेगा लेकिन उन्होने इस दस्तावेज़ को निरर्थक बताया.

श्री अयालॉन ने कहा, "एनपीटी पर ईरान और इराक़ ने हस्ताक्षर कर रखे हैं. सीरिया ने हस्ताक्षर कर रखे हैं लकिन हम जानते हैं कि ये देश फिर भी इस संधि का उल्लंघन करते रहते हैं".

इसराइल ने भारत और पाकिस्तान पर भी सवाल उठाए जो परमाणु अस्त्र सम्पन्न देश हैं लेकिन उन्होने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं कर रखे.

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