नेपाल में भारतीय मुद्रा की जमाख़ोरी

Image caption नेपाल में भारतीय मुद्रा का अनधिकृत व्यापार हो रहा है

नेपाल के सीमावर्ती इलाक़ों में भारतीय मुद्रा विनिमय का अनधिकृत व्यापार शुरु हो गया है.

कारण ये है कि पिछले कुछ समय से भारतीय रुपए की उपलब्धता में कमी महसूस की जा रही है.

नेपालियों को भारतीय मुद्रा निर्धारित दर से चार से पांच प्रतिशत अधिक मूल्य पर ख़रीदनी पड़ रही है.

नेपालगंज से पहले भारतीय सीमा के भीतर रुपईडीहा नाम का एक छोटा सा गाँव है जहां नेपाली नागरिक दैनिक ज़रूरत का सामान खरीदने, इलाज कराने और विदेशों में बसे रिश्तेदारों से सस्ती टेलिफ़ोन दरों पर बात करने के लिए आते हैं.

पहले भारतीय व्यापारी सरकार द्वारा तय दर यानि नेपाल के 160 रुपये के बदले भारत के 100 रुपये का सामान दिया करते थे. लेकिन अब वो उनसे भारतीय 100 रुपये के बदले 165 मांगते हैं.

रुपईडीहा में रोज़ करोड़ों रुपयों का व्यापार और लेनदेन होता है लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने यहां के भारतीय बैंकों के भीतर या बाहर मुद्रा विनिमय के अधिकृत एजेंट नही बनाये हैं.

इसलिए अब बहुत से लोग भारतीय बाज़ार में बनी पान की दूकानों या गन्ने के रस की दूकानों पर बैठकर मुद्रा विनिमय का काम करने लगे हैं.

एटीएम मशीनें ख़ाली

नेपाल के अनेक नागरिक और व्यापारी पड़ोस के नानपारा और दूसरे शहरों में जाकर बैंकों की एटीएम मशीनों से भारतीय रुपया निकाल रहे हैं जिससे एटीएम मशीने तुरंत ख़ाली हो जाती हैं.

नेपालगंज में व्यापारी पहले भारतीय पांच सौ और हज़ार रुपये के नोट लेने में आनाकानी करते थे लेकिन अब वो बड़ी ख़ुशी से भारतीय मुद्रा ले रहे हैं.

बताया गया कि नेपाली नागरिक और व्यापारी भारतीय मुद्रा जमा कर रहे हैं.

नेपालगंज में अधिकृत मनी एक्सचेंज काउंटर खुले हैं फिर भी वहाँ नेपाली मुद्रा को बदलने में निर्धारित दर से 20 से 30 गुना कमीशन लिया जा रहा है.

नेपालगंज के एक व्यापारी गणेश मान थापा ने कहा, "भारत आना जाना, इलाज, ख़रीदारी आदि के लिए भारतीय मुद्रा की ज़्यादा ज़रूरत पड़ती है और उसकी कमी है. इसलिए पहले 100 रुपए में 15 पैसे कमीशन मिलता था लेकिन आजकल वो दो रुपए ले रहे हैं और दलाल तीन रुपए में बेच रहा है".

भारतीय मुद्रा की जमाख़ोरी

नेपाल का लगभग 60 प्रतिशत व्यापार भारत के साथ होता है. लेकिन हाल के वर्षों में भारत से आयात बढ़ा है और निर्यात कम हुआ है.

इस वजह से नेपाल में भारतीय मुद्रा का आना भी कम हुआ है.

लेकिन इन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है नेपाल के राष्ट्रीय बैंक यानि रिजर्व बैंक के नव नियुक्त गवर्नर का हाल में दिया गया बयान कि नेपाल भारतीय मुद्रा के साथ अपनी विनिमय दर संशोधित कर सकता है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक तेज़ी से बढ़ रही है जिसका नेपाली मुद्रा पर बहुत दबाव पड़ रहा है.

भारत और नेपाल की मुद्रा विनिमय दर पिछले 17 सालों से स्थिर है.

नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर के इस बयान के बाद नेपाली मीडिया में इस बात की संभावना जताई जा रही कि नेपाल आगे चलकर अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर सकता है.

जानकारों का कहना है कि हो सकता है इस वजह से भी नेपाली लोग भारतीय रूपया जमा कर रहे हों.

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