ब्रिटेन में भारतीय डॉक्टरों के लिए अवसर

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Image caption ब्रिटेन में जूनियर डॉक्टरों की कमी से वहां अस्पतालों की सेवाओं पर खासा असर पड़ा है

बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक ब्रिटेन में इस साल अगस्त महीने में जूनियर डॉक्टरों की कमी हो जाएगी जिसे देखते हुए भारत से डॉक्टरों की भर्ती करने की कोशिश की जा रही है.

हाल के वर्षों में बाहर के देशों से ब्रिटेन आने वाले लोगों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं जिससे कई पेशेवरों को ब्रिटेन छोड़कर अपने देश वापस लौटना पड़ा है. इसके अलावा नए यूरोपीय प्रावधानों में डॉक्टरों के लिए काम के घंटे भी सीमित कर दिए जाने से ब्रिटेन में बड़ी संख्या में डॉक्टरों के पद खाली हो गए हैं. नए यूरोपीय प्रावधानों के तहत डॉक्टर एक हफ़्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकते हैं.

वेल्स में मेडिकल ट्रेनिंग के पोस्टग्रेजुएट डीन प्रोफेसर डैरेक गेलेन ने कहा, “बाहर से होनी वाली भर्तियों पर हमने बड़ी जल्दी रोक लगा दी, बिना यह महसूस किए कि दो-तीन या चार सालों में इस कदम के क्या नतीजे होंगे.”

उन्होंने कहा, “काम करने के घंटों से जुड़े नए यूरोपीय प्रावधानों से तो हमारे पेशे में बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है.”

पहली पसंद ब्रिटेन वेल्श डीनरी ब्रिटेन के उन चार मेडिकल ट्रेनिंग स्कूलों में से एक है, जो इस साल भारत से भर्तियां कर रहा है.

कोलकाता में हुए ऐसे ही इंटरव्यू के जरिए चुने गए डॉक्टरों में से एक डॉ लोपामुद्रानाथ चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में बताया, “मैं पहले भी ब्रिटेन में काम कर चुका हूं. वहां जूनियर डॉक्टरों के लिए होने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम काफी अच्छे होते हैं. मेरी पहली पसंद हमेशा से ही ब्रिटेन जाने की रही है.”

ब्रिटेन के मेडिकल ट्रेनिंग स्कूलों की योजना है कि पैडियाट्रिक्स, ऑब्सट्रेट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, एनेस्थीसिया के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं के लिए भर्तियां की जाएं. ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी डॉक्टर फिरदौस अदेनवाला ने बताया कि 2006 में इमिग्रेशन नियमों को कड़े बनाए जाने के बाद इन नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या में बड़ी कमी आई है.

उन्होंने बताया, “दूसरे देशों के डॉक्टरों के लिए नौकरियां उन क्षेत्रों में रहीं जहां ब्रिटिश डॉक्टर जाना नहीं चाहते.”

बीएपीआईओ से संपर्क

बड़े शहरी इलाकों के बाहर जूनियर डॉक्टरों की सबसे अधिक जरूरत पड़ रही है. किर्ककैल्डी स्थित विक्टोरिया हॉस्पिटल को जूनियर डॉक्टरों की कमी की वजह से इस साल मई महीने में उन्हें अपना दुर्घटना और आपातकालीन विभाग बंद करना पड़ा. कुछ इन्हीं वजहों से इनिस्क्लेन स्थित इर्नी हॉस्पिटल को अपना ऑब्सटेट्रिक ऐंड गायनोकॉलॉजी विभाग कई हफ़्ते तक बंद करना पड़ा.

ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ओरिजिन (बीएपीआईओ) से संपर्क किया है ताकि भारत से कई सौ जूनियर डॉक्टरों की भर्ती की जा सके.

बीएपीआईओ ने सरकार की मदद करने के लिए सहमति जताई है.

बीएपीआईओ के प्रेसिडेंट डॉ रमेश मेहता ने जोर दिया है जरूरतों के मुताबिक महज रिक्तियां भरने के लिए इस्तेमाल के बजाय भारतीय डॉक्टरों को उचित ट्रेनिंग के लिए ब्रिटेन में पर्याप्त समय तक रहने की मंजूरी दी जाए.

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