सैनिक ख़र्च में बढ़ोतरी

रॉकेट
Image caption आर्थिक सकंट के बावजूद सैनिक साज़ो-सामान पर दुनिया भर में ख़र्च बढ़ा है.

विश्व पर छाए आर्थिक संकट के बावजूद एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हथियारों पर ख़र्च किए जाने वाले धन में बढ़ोतरी हुई है.

‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीच्यूट’ यानि सिपरी के अनुसार गत वर्ष दुनिया भर में हथियारों पर ख़र्च किए गए धन में लगभग छह फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

संस्था के मुताबिक सैन्य साज़ो-सामान पर वर्ष 2009 में क़रीब 1500 बिलियन अमरीकी डॉलर ख़र्च किए गए.

हथियारों पर ख़र्च करने वालों में सबसे ऊपर अमरीका का नाम है, उसके बाद चीन का फ़्रांस आते हैं. चीन वर्ष 2008 में भी दूसरे स्थान पर था.

रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका ने अपने सैनिक ख़र्चे में क़रीब 54 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की है. अमरीका ने 2009 में अफ़गानिस्तान में अपनी सैन्य तैनाती को दोगुना किया और वहां अमरीका का ख़र्च इराक़ में हो रहे सैनिक ख़र्च से भी अधिक हो गया है.

'सामरिक विकल्प'

संस्था के अनुसार सैन्य साज़ो-सामान पर ख़र्च दीर्घ-कालीन सामरिक विकल्पों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके लिए कई देश आर्थिक दिक्कतों के बावजूद धन व्यय करने के इच्छुक रहते हैं.

संस्था के पास जिन देशों के आंकड़े थे उनमें से 65 प्रतिशत ने हथियारों पर ख़र्च में बढ़ोतरी की है.

संस्था के आंकड़ों से पता चलता है कि एशिया और ओशियाना क्षेत्र में सैनिक ख़र्च पर सबसे तेज़ इजाफ़ा हुआ है.

‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीच्यूट’ के अनुसार वर्ष 2009 में अमरीका,रुस,चीन,ब्रिटेन,फ़्रांस,भारत,पाकिस्तान और इसराइल में 8,100 परमाणु हथियार थे.

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