बच्चों के लिए आगे आया किशोर

बिलाल राजन
Image caption बिलाल राजन ने चार साल की उम्र में पहली बार अभियान चलाया था.

कनाडा का एक किशोर बच्चों के कल्याण की ख़ातिर पैसा जमा करने के लिए लोगों को नंगे पैर चलने के लिए प्रेरित कर रहा है.

बिलाल राजन 13 साल के हैं और टोरंटो में रहते हैं. वे लोगों से अपील कर रहे हैं कि उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए कम से कम एक घंटा बिना जूतों के चलना चाहिए.

वे प्रतिभागियों के दोस्तों और परिवार से उन्हें प्रायोजित करने और उससे हुई आय को यूनिसेफ की कनाडा इकाई को दान करने की अपील करते हैं.

ग़रीब बच्चों के लिए

बीबीसी से बातचीत में बिलाल राजन ने कहा, ''वे लोगों को कम भाग्यशाली लोगों की ज़रूरतें समझाना चाहते हैं.''

वे कहते हैं, ''इन बच्चों को अगर अवसर में मिले तो आप वास्तव में यह देख पाएँगे कि वे स्कूल कैसे जाते हैं.''

उन्होंने कहा, ''मैं चाहता हूँ कि दूसरे लोग यह महसूस करें कि हम कितने भाग्यशाली हैं कि हमारे पास पीने के लिए साफ़ पानी और पहनने के लिए जूते हैं, वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो बिना जूतों के जी रहे हैं.''

भारत के गुजरात में 2001 में आए भूकंप में एक पुजारी की मौत की ख़बर सुनकर बिलाल ने पहली बार इस तरह का अभियान शुरू किया था. उस समय उनकी उम्र केवल चार साल थी.

बिलाल कहते हैं, ''अचानक मुझे लगा कि मेरे पिता मर रहे हैं, वास्तव में यह सुखद नहीं था.'' बिलाल के पिता भी एक पुजारी हैं.

वे कहते हैं, ''मैंने अपने आसपास के इलाक़ों में घर-घर जाकर संतरे बेचना शुरू किया और इस तरह से मैने तीन सौ डॉलर जुटाए.''

प्रोत्साहन

शुरुआती दौर में बिलाल को मिली इस सफलता ने बाद में उन्हें इस तरह के अभियानों के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने भारत में आए सुनामी के पीड़ितों और इस साल हैती में आए भूकंप में बेघर हुए लोगों की मदद के लिए अभियान चलाए.

वे कहते हैं, ''एक व्यक्ति के रूप में आप कुछ अलग कर सकते हैं लेकिन एक समूह के रूप में आप दुनिया बदल सकते हैं.''

पैसा जमा करने वाले उनके अभियानों को देखते हुए बिलाल को 2005 में यूनिसेफ़ कनाडा का आधिकारिक युवा ब्रांड अंबेसडर चुना गया था.

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