चरमपंथी बन सकते हैं मुसलमान क़ैदी

Image caption रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के जेलों में सभी मुसलमान क़ैदियों को एक ही चश्मे से देखा जाता है.

एक रिपोर्ट का कहना है कि ब्रिटेन के जेलों में बंद मुसलमान वहां के कर्मचारियों के बर्ताव की वजह से चरमपंथ की ओर बढ़ सकते हैं.

जेल विभाग के चीफ़ इंस्पेक्टर डेम ऐन ओवर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेल स्टाफ़ मुसलमान क़ैदियों को व्यक्तिगत तौर पर देखने की बजाए उन सबको एक ही सुरक्षा चश्मे से देखते हैं.

तीन साल पहले जेल स्टाफ़ के लिए प्रशिक्षण की शुरूआत हुई जिसमें क़ैदियों के बीच चरमपंथ के बढ़ते लक्षणों को पहचानकर उन पर उचित कार्रवाई करना सिखाया जा रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे हर मुसलमान क़ैदी के बारे में ये सोच पनपी कि वो चरमपंथी बन सकता है.

वास्तविकता ये भी है कि इंग्लैंड और वेल्स के जेलों में 10,000 मुसलमान क़ैदियों में से सिर्फ़ एक प्रतिशत आतंकवाद से जुड़े आरोपों में बंद हैं.

रिपोर्ट ने अपनी जांच में पाया है कि इस बर्ताव और इस तरह की सोच की वजह से मुसलमान क़ैदी निराश और हतोत्साहित रहते हैं और जेल स्टाफ़ और उनके बीच एक दूरी रहती है.

चीफ़ इंस्पेक्टर डेम ऐन ओवर्स का कहना है, “इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जेल में बंद क़ैदियों में चरमपंथी विचारधारा वाले लोग नहीं हैं लेकिन इससे सभी मुसलमान क़ैदियों को एक ही चश्मे से देखना ग़लत होगा.”

इस रिपोर्ट के बाद जेल के अधिकारियों ने कहा है जेल की नीति सभी क़ैदियों के साथ ‘सम्मानजनक’ बर्ताव करने की है.

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