निकोबार द्वीप में भूकंप के झटके

फ़ाइल तस्वीर
Image caption वर्ष 2004 में भूकंप के बाद उठी सुनामी लहरों में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था.

भारत के निकोबार द्वीप के क़रीब रविवार को तड़के तीव्र भूकंप आया. अमरीका के 'भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण' विभाग के मुताबिक़ रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.5 थी.

भारत में सूनामी पर नज़र रखने वाले एक केंद्र ने इस भूकंप के बाद निकोबार द्वीप के निकट समुद्र में 50 सेंटीमीटर तक की सूनामी लहरें उठने का अनुमान लगाया था लेकिन बाद में ये चेतावनी वापस ले ली गई.

निकोबार के डिप्टी कमिश्नर टी श्रीकांत ने बीबीसी को बताया है कि इस भूकंप से जान-माल का कोई नुक़सान नहीं हुआ है.

टी श्रीकांत ने बताया, “हालात का जायज़ा लिया जा चुका है. निकोबार ज़िले के कुछ द्वीपों के लिए ‘सूनामी वॉच’ यानि सूनामी के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई थी. हम सब पूरी तरह से सजग हैं और अबतक हमें किसी तरह के नुक़सान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.”

'नुकसान की रिपोर्ट नहीं'

निकोबार के डिप्टी कमिश्नर ने जानकारी दी कि भूकंप का विश्लेषण हैदराबाद स्थित भारत सरकार की संस्था ‘इंडियन नेशनल सेंटर फ़ॉर ओशन इनफ़ोर्मेशन सर्विसेज़’ ने किया है.

श्रीकांत ने कहा, “वर्ष 2004 में सूनामी के बाद तटीय इलाक़ों में बहुत कम लोग बचे हैं क्योंकि हमने लोगों का पुनर्वास द्वीप में ऊंचाई वाली जगहों पर किया है. फिर भी सब को एलर्ट कर दिया गया था.”

इस क्षेत्र में सूनामी पर निगाह रखने वाली संस्था ‘पेसिफ़िक सूनामी वॉर्निंग सेंटर’ की वेबसाइट पर कहा गया है कि भूकंप से तबाही मचाने वाली सूनामी लहरों के उठने का ख़तरा एक हज़ार किलोमीटर तक रहता है.

हालांकि वेबसाइट का कहना है कि फ़िलहाल ये नहीं मालूम की भूकंप के बाद सूनामी लहरें उठीं भी हैं या नहीं.

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