'पाक को फ़ौजी मदद शर्तों के साथ'

Image caption रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी नेता कई चरमपंथी संगठनों को मदद दे रहे हैं.

एक प्रभावशाली ग़ैर सरकारी अमरीकी संगठन ने कहा है कि यदि पाकिस्तान चरमपंथी संगठनों को मदद देना बंद नहीं करता तो उसे मिलनेवाली अमरीकी सैनिक मदद पर रोक लगा देनी चाहिए.

थिंक टैंक रैंड कार्पोरेशन ने कहा है कि कुछ चरमपंथी गुटों को पाकिस्तान से जारी मदद की वजह से ही अमरीका के ख़िलाफ़ हमलों की साजिशें बढ़ रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “परमाणु हथियारों से लैस हो जाने के बाद से पाकिस्तान ने चरमपंथी संगठनों को खुलकर मदद करना शुरू किया क्योंकि उसे भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई का ख़तरा नहीं रहा.”

रैंड कार्पोरेशन को अमरीका में ख़ासी अहमियत दी जाती है और अमरीकी रक्षा विभाग अक्सर इस थिंक टैंक की राय लेता है.

सोमवार को जारी रिपोर्ट में संगठन ने कहा है, “अल क़ायदा, लश्कर ए तैबा, जैश ए मोहम्मद जैसे संगठन पाकिस्तान में जड़ जमाए हुए हैं और पाकिस्तान के साथ साथ पूरे क्षेत्र के लिए ख़तरा पैदा कर रहे हैं.”

भारत मुंबई हमलों के लिए लश्कर ए तैबा को ज़िम्मेदार मानता है.

रिपोर्ट के लेखकों में से एक सेथ जोंस का कहना है कि 2001 के बाद से कुछ चरमपंथी संगठनों पर रोक लगी है लेकिन अभी भी कई संगठन पाकिस्तान ही नहीं अमरीका और कई अन्य देशों के लिए ख़तरा बने हुए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी नेता कुछ संगठनों को मदद देना जारी रख रहे हैं लेकिन कोई ऐसी आतंकविरोधी नीति नहीं बना पाए हैं जिससे स्थानीय नागरिकों की रक्षा की जा सके.

Image caption पाकिस्तानी सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों पर पहले भी तालिबान और चरमपंथी संगठनों से संबंध का आरोप लगता रहा है.

रिपोर्ट का कहना है कि ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद से चरमपंथी गुटों को मदद देने की नीति का उल्टा असर हुआ क्योंकि तहरीक ए तालिबान समेत कई अन्य चरमपंथी गुटों ने पाकिस्तान ज़मीन पर भी आतंकवादी हमले शुरू कर दिए.

जोंस का कहना है, “पाकिस्तान ने लंबे समय तक चरमपंथी गुटों को अपनी विदेश नीति के अहम हथियार की तौर पर इस्तेमाल किया है और इससे मुक्ति पाने में समय लगेगा.”

उनका कहना है कि अमरीका को (इन चरमपंथी गुटों को ख़त्म करने के लिए) पाकिस्तान के साथ एक निश्चित समयसीमा और तय मापदंडों के तहत काम करना चाहिए.

उनका कहना है, “सैनिक मदद को इन मापदंडों के पूरा होने की शर्तों के साथ जोड़ा जाए.”

पिछले हफ़्ते ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स ने भी एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का अफ़गान तालिबान के साथ सीधा संबंध है.

इसमें कहा गया था कि आईएसआई तालिबान को पैसों से मदद करती है और उन्हें प्रशिक्षण भी देती है.

पाकिस्तान ने इन आरोपों का ये कहकर खंडन किया था कि कुछ पाकिस्तानी विरोधी ताकतें ये झूठी ख़बरें फैला रही हैं.

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