भारतीय छात्र बिशकेक में अटके

पिछले बीस सालों की ये सबसे भीषण नस्ली हिंसा है.

किर्गिस्तान में जारी नस्ली हिंसा में फंसे 105 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि हिंसा ग्रस्त ईलाको से निकाले गए भारतीयों को किर्गिस्तान की राजधानी बिशकेक लाया गया है.

वहीं बिशकेक मे फंसे भारतीय छात्रों का कहना है उन्हे बिशकेक तो ज़रुर लाया गया है पर भारतीय उच्चायोग ने अब उन्हे उनके हाल पर छोड दिया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने बीबीसी को बताया " भारतीय छात्रों को ओश और जलालाबाद शहर से निकलने के लिए मदद की जरुरत थी और भारतीय उच्चायोग ने ये मदद मुहया करवाई. अब बिशकेक से हवाई उडान सामान्य है. और जैसे भी भारतीय छात्र वापस आना चाहते है वो अपनी मर्जी से आ सकते है."

अब बिशकेक से हवाई उडान सामान्य है. और जैसे भी भारतीय छात्र वापस आना चाहते है वो अपनी मर्जी से आ सकते है.

विष्णु प्रकाश ,भारतीय विदेश मंत्रालय प्रवक्ता

हिंसाग्रस्त ईलाको से निकाले गए भारतीयों को बिशकेक मे ठहराने के लिए की गई व्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब मे विष्णु प्रकाश ने कहा " जिसे भी मदद की ज़रुरत होगी, उसे मदद दी जाएगी."

बिशकेक मे अटके

बिशकेक मे फंसे भारतीय छात्रों का कहना है उन्हे बिशकेक तो ज़रुर लाया गया है पर भारतीय उच्चायोग ने अब उन्हें उनके हाल पर छोड दिया है.

शाहिर खान ओश विश्वविद्दालय में इंडियन मेडिकल स्टुडेंट फाऊंडेशन के अध्यक्ष और एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के छात्र है.

शाहिर खान की अगुवाई में भारतीय छात्रों ने मंगलवार दोपहर बिशकेक मे भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात की.

मुलाकात से वापस लौटे शाहिर खान ने बीबीसी को बिशकेक से फोन पर बताया " भारतीय उच्चआयोग ने मदद करने से इनकार कर दिया है. उन्होने कहा है कि अगर आप जाना चाहें तो अपने खर्चे पर जा सकते है."

हालात खराब है

105 भारतीयों छात्रो में से 10 लडकियाँ है जो कि स्थिति से काफ़ी घबराई हुई है.

हम उच्चआयोग के सामने भूखे प्यासे बैठे हुए है. हमें कोई हवाई उडान उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है और यहाँ रुकना सुरक्षित नहीं है और हमारे साथ कुछ भी हो सकता है.

तृप्ती गुप्ता, बिशकेक में भारतीय छात्र

ओश विश्वविघालय से एमबीबीएस की पढाई कर रही तृप्ति गुप्ता कहती है " हम उच्चआयोग के सामने भूखे प्यासे बैठे हुए है. हमें कोई हवाई उडान उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है और यहां रुकना सुरक्षित नहीं है. यहां हालात ख़राब है और हमारे साथ कुछ भी हो सकता है."

ओश विश्वविघालय के डायरेक्टर ने भी इन सभी छात्रो को स्थिति सामान्य होने तक देश वापस जाने की सलाह दी है. वहीं भारतीय उच्चायोग ने पैसे की कमी का हवाला देकर छात्रों से कहा है कि वो बिशकेक मे ही अपने जानकार या दोस्तों के पास अपने रहने का इंतज़ाम करें.

ओश विश्वविघालय से एमबीबीएस की पढाई कर रहे भूपेन्द्र सिहं ने बीबीसी को बताया " भारतीय उच्चआयोग ना खाने की मदद कर रहा है , ना रहने की मदद कर रहा है और ना ही वापस भारत जाने मे हमारी मदद कर रहे है. उच्चायोग ने हमें कहा कि हम अगर किराया दें तो वो हमारे लिए चार्टर्ड फ्लाईट कर सकते है."

फिलहाल भारतीय छात्र अभी भी बिशकेक मे ही अटके हुए है.

ख़तरा पड़ोस में भी

इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी जारी की है कि किर्गिस्तान में नस्ली हिंसा नहीं रूकी तो वो पड़ोसी देशों तक भी फैल सकती है.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा है कि किर्गिस्तान के अन्य अल्पमत समुदायों पर भी ख़तरा है.

अब तक की हिंसा में 170 लोग मारे जा चुके हैं और आशंका है कि मरने वालों की संख्या और ज़्यादा हो सकती है क्योंकि कई मारे गए लोगों की जानकारी दर्ज नहीं की गई है.

उल्लेखनीय है कि किर्गिस्तान में क़रीब 70 प्रतिशत आबादी किर्गिज़ लोगों की है जबकि 15 प्रतिशत उज़बेक आबादी है.

ओश इस देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और वहां उज़बेक समुदाय के लोग काफ़ी बड़ी संख्या में रहते हैं.

ओश में किर्गिज़ और उज़बेक लोगों में ज़मीन-जायदाद को लेकर तनाव रहता है.

वर्ष 1990 में भी इन दोनों समुदायों में हुए ख़ूनी संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे गए

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