विस्थापितों में अफ़ग़ान, इराक़ी सबसे अधिक

शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर का कहना है कि शरणार्थियों के लिहाज़ से वर्ष 2009 पिछले दो दशकों में सबसे ख़राब साल रहा है और लगभग चार करोड़ 33 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा.

यूएनएचसीआर ने वर्ष 2009 के लिए जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल सबसे कम संख्या में शरणार्थी अपने घरों को वापस लौटे.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था का कहना है कि पिछले वर्ष पूरी दुनिया में विस्थापित हुए लोगों में से करीब आधे सिर्फ़ दो मुल्कों अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ के थे.

यूएनएचसीआर के आंकड़ों के मुताबिक विश्वभर में विस्थापित होने वाले हर चार व्यक्तियों में एक अफ़ग़ानिस्तान का नागरिक था.

वर्ष 2009 के लिए जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की विभीषिका झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान में पिछले वर्ष लगभग 29 लाख लोग बेघरबार हो गए.

अफ़ग़ानिस्तान में फ़िलहाल पश्चिमी सेनाओं और तालिबान लड़ाकों के बीच जंग जारी है जिसमें न सिर्फ़ दोनों पक्षों की ओर से शामिल लोग बड़ी संख्या में जान गँवा रहे है बल्कि इसका असर देश के आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है जिन्हें बड़ी संख्या में घर बार से हाथ धोना पड़ रहा है.

शरणार्थी बढ़े

संयुक्त राष्ट्र संस्था का कहना है कि पिछले वर्ष विस्थापित हुए लोगों की संख्या 90 के दशक के बाद से सबसे ज्यादा है.

रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को शरण मिली है और वहां इस वक़्त 17 लाख शरणार्थी रह रहे हैं जिनमें ज़्यादातर अफ़ग़ानिस्तान से बेघरबार होकर आए हैं.

ईरान में भी 10 लाख से अधिक शरणार्थियों ने पनाह ले रखी है.

हालाँकि बड़ी संख्या में अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक वापस लौटते रहे हैं लेकिन पिछले वर्ष ये संख्या बहुत कम थी.

यूएनएचसीआर कमिश्नर एंतोनियो गुतरेस का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान, सोमालिया और डेमोक्रटिक रिपब्लिक आफ़ कांगो जैसे देशों में जारी संघर्ष ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा.

दक्षिणी सूडान और इराक़ में लग रहा था कि संघर्ष ख़त्म होने के कगार पर है, पर वह कहीं उलझ कर रह गया.

इन सबका नतीजा है कि पिछले वर्ष लोग पिछले 20 वर्षों की तुलना में सबसे कम लौटे.

इस नई रिपोर्ट में कुछ नए तथ्य भी सामने आए हैं.

अब ज्यादा शरणार्थी विकासशील देशों में रह रहे हैं जो उस सोच के बिलकुल विपरीत है जिसके तहत ये माना जाता था कि शरणार्थी विकसित देशों की तरफ रुख़ करते हैं और वे शहरी इलाकों में ही पनाह लेते हैं.

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