हर वेबसाईट को देखने का हक

Image caption अमरीकी सरकार ब्राडबैंड कंपनियों को नियंत्रित करना चाहती है.

अमरीकी सरकार ब्राडबैंड सेवा देने वाली कंपनियों को नियंत्रित करना चाहती है.

अमरीकी सरकार का कहना कि इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने वाली कंपनियां अमरीकी उपभोक्ताओं के इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को निर्धारित ना करे.

अगले 10 साल में ओबामा प्रशासन हर अमरीकी को तेज़ गति ब्राडबैंड उपलब्ध करवाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है. साथ ही अमरीकी सरकार चाहती है कि सभी वेबसाईटों को बिना किसी भेदभाव के इस्तेमाल किया जा सके.

सरकार नहीं चाहती कि इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने वाली कंपनियां ये बताएं की कौन सी वेबसाईट देखनी है और कौन सी नहीं.

अमरीकी सरकार जब तक इंटरनेट को अलग से वर्गीकृत ना कर दे तब तक उसके पास इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने वाली कंपनियों को निर्देश देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.

डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पब्लिक नॉलेज भी सरकार के इस कदम का समर्थन करती है. पब्लिक नॉलेज के कानूनी निर्देशक हॉरोल्ड फील्ड कहते है कि इंटरनेट की पहुंच को बडे व्यापारियों के विवेक पर नहीं छोड़ना चाहिए.

हॉरोल्ड फील्ड कहते है " ये मामला इतना महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि हमारे बच्चों की पढाई की योजना तेज इंटरनेट पर निर्भर है. हमारी जीविका की योजनाएं इस पर निर्भर है. जब हम समाज में जनता कि भागीदारी की बात करते है तो ये मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. जैसे बिजली और फोन का इस्तेमाल. "

वहीं अमरीका की वायरलैस संस्था सीटीआईए के मुखिया स्टीव लॉरजेंट का कहना है कि सरकारी नियंत्रण इस क्षेत्र मे निवेश का गला घोंट देगा.

स्टीव लॉरजेंट कहते है " इस क्षेत्र में असाधारण विकास है, असाधारण प्रतिस्पर्धा है और असाधारण निवेश है. सरकारी नियंत्रण इस जोशपूर्ण क्षेत्र में खतरा पैदा कर देगा. हमें लगता है कि ये गलत कदम है."

सरकार के निंयत्रण प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान कानूनी चुनौतियां पेचीदगियों को बढा सकती है. हो सकता है कि आखिरकार कोर्ट और कांग्रेस ये निर्धारित करे कि अमरीका में इंटरनेट पर किसका नियंत्रण हो.

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