लाहौर में आत्मघाती हमले, 40 मौतें

दाता दरबार में धमाके

लाहौर की एक सूफ़ी दरगाह में दो आत्मघाती बम हमलावरों ने धमाके किए हैं. धमाकों में 40 से अधिक लोग मारे गए हैं और 170 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं.

ये हमले गुरुवार रात को उस समय हुए जब बड़ी संख्या में ज़ायरीन लाहौर की चर्चित दरगाह दाता दरबार में मौजूद थे.

फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई को किसने अंजाम दिया है. बीबीसी संवाददाता सैयद शोएब हसन के मुताबिक किसी संगठन ने हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

पर्यवेक्षकों के अनुसार वर्ष 2001 से हो रहे चरमपंथी हमलों में, किसी भी सूफ़ी दरगाह पर ये सबसे बड़ा हमला है.

एक के बाद एक धमाका

ये दरगाह ईरान के सूफ़ी संत अबुल हसन अली हजवेरी की है.

लाहौर के कमिश्नर खुसरो परवेज़ ने कहा, "ये आत्मघाती हमले दरगाह के मुख्य अहाते में और तहख़ाने में हुए. हर फ़िदायीन दस से पंद्रह किलोग्राम विस्फोटक के साथ आया था."

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि पहले हमलावर ने दाता दरबार की निचली मंज़िल में धमाका किया. जब लोगों में अफ़रा-तफ़री मच गई और वे भागने लगे तो दूसरे हमलावर ने ऊपरी मंज़िल में धमाका किया.

पुलिस के अनुसार विस्फोटकों के साथ-साथ बॉल बेयरिंग और ऐसे अन्य चीज़े पैक की गई थीं ताकि अत्यधिक क्षति पहुँचाई जा सके.

एक प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद नासिर ने बताया, "वहाँ बहुत ही भयावह स्थिति थी. चारों तरफ़ लाशें बिखरी हुई थीं. ख़ून फ़ैला हुआ था. लोग बिलख-बिलख कर रो रहे थे."

घायलों को लाहौर के मेयो अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. कुछ घायलों को गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मेयो अस्पताल में सुरक्षा के बंदोबस्त कड़े कर दिए गए हैं.

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि घटनास्थल से दो हमलावरों के सर बरामद किए गए हैं.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस हमले से संकेत मिलते हैं कि हिंसा सामुदायिक संघर्ष का मोड़ ले रही है.

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