हिज़्बुल्लाह के मार्गदर्शक फ़ज़लुल्लाह का निधन

फ़ज़लुल्लाह
Image caption फ़ज़लुल्लाह धार्मिक गुरू होने के अलावा एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे

लेबनान में शिया समुदाय के धार्मिक गुरू फ़ज़लुल्लाह की मौत हो गई है. उनकी उम्र 74 वर्ष थी. अयातुल्ला मोहम्मद हुसैन फ़ज़लुल्लाह 1982 में स्थापित चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह के संस्थापकों में से एक थे.

वे अमरीका के प्रखर आलोचक थे और 1979 में ईरान में हुए इस्लामिक क्रांति का उन्होंने समर्थन किया. शिया समुदाय में उनके अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है और इस समुदाय में वे उदारवादी सामाजिक विचारों की वजह से जाने जाते हैं.

मुस्लिम समाज में महिलाओं की भूमिका पर उनकी सोच प्रगतिशील थी. फ़ज़लुल्लाह पिछले कई हफ़्ते से बीमार थे लेकिन शुक्रवार को सांस की तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

उनकी मौत की खबर मिलने के बाद हिज़बुल्लाह के टीवी स्टेशन अल-मीनार ने बीच में ही अपना कार्यक्रम प्रसारण रोक दिया और कुरान पढ़ा जाने लगा.

शिया समुदाय में बड़ा सम्मान

बगदाद में बीबीसी संवाददाता जिम म्युर का कहना है, "भले ही अमरीका उन्हें आतंकवाद में शामिल माने लेकिन दुनिया भर में शिया समुदाय के लोगों में वे सबसे खास धार्मिक गुरू माने जाते थे. वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने ढेर सारे धार्मिक स्कूल, अस्पताल और लाइब्रेरी खुलवाए."

इराक़ के धार्मिक शहर नजफ़ में पैदा हुए फ़ज़लुल्लाह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1966 में लेबनान चले गए.

माना जाता है कि बेरूत में 1985 में हुए कार बम हमले के जरिए फ़ज़लुल्लाह की हत्या करने की कोशिश की गई. हमले में 80 लोग मारे गए थे, इन हमलों में अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ माना जाता है.

अपने आखिरी दिनों में फ़ज़लुल्लाह ने हिज़बुल्लाह के ईरान से संबंधों की वजह से खुद को संगठन से दूर कर लिया था. लेकिन वे मध्य पूर्व और इसरायल में अमरीकी नीतियों के विरोधी बने रहे.

उन्होंने बराक ओबामा के अमरीका के राष्ट्रपति बनने का स्वागत किया था. लेकिन पिछले साल ही उन्होंने इस बात से निराशा जताई थी कि मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति लाने के लिए उनके पास कोई योजना नहीं है.

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