वेबसाइटों के ज़रिए अपराधियों की खोज

Image caption सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के ज़रिए फ़रार अपराधियों का पता लगाने की कोशिश

अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल अब अपराधियों का पता लगाने के लिए इंटरनेट पर मेल-जोल बढ़ाने वाली वेबसाइटों के इस्तेमाल पर ज़ोर दे रहा है.

आमतौर पर लोग फ़ेसबुक, ट्विटर, माइस्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का इस्तेमाल मित्रों से सम्पर्क बनाए रखने के लिए करते हैं.

लेकिन अब इंटरपोल ने अपील की है कि जब वो इन वेबसाइटों पर जाएं तो उन अपराधियों पर भी नज़र रखें जिनकी उन्हे तलाश है.

इंटरपोल ने ऐसे 26 अपराधियों के नाम जारी किए हैं और उसे आशा है कि इनका पता चल जाएगा.

इनमें हत्यारे, बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वाले और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले शामिल हैं.

फ़रार लोगों की इस सूची में बांगलादेश के प्रथम राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर्रहमान और उनके परिवार की हत्या का दोषी पाए गए एक व्यक्ति का नाम भी शामिल है.

इंटरपोल की अपील

हालांकि इस तरह की अपील कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार लोगों से इंटरनेट पर नज़र रखने को कहा गया है.

इस अभियान का नेतृत्व कर रहे मार्टिन कॉक्स का कहना है कि इस बात की काफ़ी संभावना है कि कोई न कोई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के ज़रिए इन फ़रार अपराधियों को पहचान लेगा.

इंटरपोल ने कहा है कि अगर किसी को कोई जानकारी मिलती है तो वो ईमेल द्वारा उसे सूचित करे.

ये अपील इंटरपोल के 'इन्फ़्रारेड' अभियान का नवीनतम चरण है.

इंटरपोल का कहना है कि इस अभियान के दौरान मई के महीने से अब तक 450 फ़रार अपराधियों को लक्ष्य बनाया गया है और इनमें से 100 से अधिक लोगों का या तो पता लगा लिया गया है या उन्हे गिरफ़्तार कर लिया गया है.

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटें अपराधियों और उन्हे पकड़ने की कोशिश करने वालों में काफ़ी लोकप्रिय होती जा रही हैं.

ब्रिटेन के एक अपराधी ने पिछले साल जेल से भाग निकलने के बाद पुलिस को चिढ़ाने के लिए फ़ेसबुक पर अपने बारे में सुराग़ पोस्ट करके इंटरनेट सनसनी फैला दी थी.

चार महीने बाद उसे पुलिस ने पकड़ लिया.

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