इसराइल-फ़लस्तीनियों में सीधी बात हो: ओबामा

ओबामा-नेतन्याहू

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने इसराइल और फ़लस्तीनियों से शांति वार्ता फिर शुरू करने का अनुरोध किया है. उनका कहना था कि ये 'सीधी बातचीत' करने का उचित समय है.

व्हाइट हाउस में इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात के बाद ओबामा ने ये बातें कहीं.

दोनों नेताओं ने अमरीका और इसराइल के रिश्तों में खटास आने की बात से इनकार किया और ओबामा ने कहा कि दोनों देश के रिश्ते ‘अटूट’ हैं.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वो मानते हैं कि इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू फ़लस्तीनियों के साथ शांति चाहते हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछली बार मार्च में राष्ट्रपति ओबामा ने नेतन्याहू का बड़ा ठंडा स्वागत किया था.

राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि अमरीका इसराइल से कभी ऐसे क़दम उठाने को नहीं कहेगा जिससे उसकी सुरक्षा ख़तरे में पड़े.

राष्ट्रपति ओबामा ने इसराइली प्रधानमंत्री की ग़ज़ा की नाकेबंदी में ढील देने की घोषणा की तारीफ़ की.

हालांकि वर्ष 2007 से ग़ज़ा का शासन चला रहे हमास ने इन रियायतों को ख़ारिज किया है.

हमास का कहना है कि इस ढील का कोई फ़ायदा नहीं होगा और नाकेबंदी पूरी तरह से ख़त्म होनी चाहिए.

नाकेबंदी

ग़ौरतलब है कि इसराइल ने वर्ष 2005 से गज़ा की नाकेबंदी कर रखी है.

पिछले कुछ हफ़्तों में वहाँ सहायता सामग्री ले जा रहे एक समुद्री जहाज़ पर हुए हमले में नौ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी. इसके बाद से इसराइल पर अपनी ग़ज़ा नीति में बदलाव लाने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा था.

इसराइल का कहना है कि ग़ज़ा जाने वाली सभी उपभोक्ता सामग्री पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है लेकिन निर्माण सामग्री केवल संयुक्त राष्ट्र की परियोजनाओं के लिए ही ले जाने की अनुमति होगी.

इसराइल के अनुसार हथियारों समेत कोई भी सामग्री जिसे सैन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, उस पर आंशिक या पूरे तौर पर पाबंदी कायम रहेगी.

इसराइल लगातार कहता रहा है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र की पाबंदी इसलिए ज़रूरी है ताकि हमास को हथियार की सप्लाई बंद की जा सके.

ग़ज़ा से निर्यात पर भी इसराइल ने पाबंदी लगा रखी है. ग़ज़ा के स्थानीय व्यापारियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने ढील को अपर्याप्त बताया है.

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