जापान में सत्ताधारी पार्टी की हार

जापान मे मतदान
Image caption जापान के संसदीय चुनावों मे मतदाताओं ने अपना फ़ैसला सुना दिया है

जापान के संसदीय चुनावों में वोट डालकर लौटे लोगों की राय के मुताबिक ऐसे संकेत मिले हैं कि सत्ताधारी डैमोक्रैटिक पार्टी ऑफ जापान, यानि डीपीजे ऊपरी सदन का बहुमत हार गई है.

लगभग पांच दशकों के बाद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को हराकर डीपीजे ने पिछले साल सरकार बनाई थी.

डीपीजे बुनियादी सुधार के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन वित्तीय घोटालों और कमज़ोर नेतृत्व की छवि के कारण उसकी लोकप्रियता दिन पर दिन घटती चली गई.

नाओटो कान पिछले महीने ही जापान के प्रधानमंत्री बने थे और कुर्सी संभालते ही उन्होंने जापान की आर्थिक हालत को ग्रीस जैसा बताकर चेतावनी दे डाली कि बढ़ते बजट घाटे को नियंत्रण में लाने के लिए बिक्री कर को दोगुना करना होगा.

शनिवार को चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नाओटो कान ने ये कहा कि जापान की अर्थव्यवस्था ग्रीस से बीस तीस गुना ज़्यादा है और जापान का क़र्ज़ भी अधिक है .इसलिए कोई भी देश जापान को नहीं बचा सकता.

उनका कहना था कि जापान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अगर तुरंत क़दम नहीं उठाए गए तो जापान की हालत भी ग्रीस जैसी हो जाएगी.

बिक्री कर को दोगुना करने की प्रधानमंत्री की प्रस्तावित योजना से लोगों में काफ़ी रोष देखा जा रहा था जिसका इज़हार मतदाताओं ने अपने मतों के ज़रिए कर दिया.

हालांकि कल ही प्रधानमंत्री को इसका भी खंडन करना पड़ा था कि सरकार ने ऐसा कोई फ़ैसला नहीं किया है.

लेकिन आज मतदान करने के बाद प्रधानमंत्री कान ने कहा कि बिक्री कर में बढ़ोतरी की घोषणा पर उन्हें कोई अफ़सोस हीं है, "ऊपरी तौर पर ये हो सकता है कि बिक्री कर में बढ़ोतरी की घोषणा करने में मैंने जल्दबाज़ी से काम लिया लेकिन अभी भी मुझे इसका अफ़सोस नहीं है, क्योंकि हमारे चुनावी घोषणापत्र में ये बात साफ़ तौर पर लिखी हुई थी कि हम इस पर द्विदलीय बहस करवाएंगे. "

औपचारिक नतीजों की घोषणा के बाद भी संसद के ज़्यादा प्रभावशाली निचले सदन पर तो डीपीजे का अभी भी नियंत्रण रहेगा.

लेकिन प्रधानमंत्री कान के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिह्न तो इन चुनाव नतीजों ने लगा ही दिया है.

टोकियो के बीबीसी संवाददाता रोलैंड ब्यूर्क का कहना है कि चुनाव में ख़राब प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री को नए सहयोगी खोजने पड़ेंगे या हो सकता है कि ख़ुद सत्ताधारी पार्टी प्रधानमंत्री को हटा दे.