पंद्रह साल बाद नसीब हो रही है कब्र

Image caption अंदाज़ा है कि उस नरसंहार में 7,000 मुसलमान मारे गए थे.

पंद्रह साल पहले स्रेब्रेनित्सा में मारे गए हज़ारों मुसलमानों में से कई को सामूहिक क़ब्रगाहों में से निकालकर फिर से दफ़नाया जा रहा है.

उस नरसंहार की 15वीं बरसी पर मारे गए लोगों में से कुछ की अब जाकर पहचान हो पाई है और उन 775 लोगों के ताबूतों को स्रेब्रेनित्सा के बाहर एक क़ब्रगाह में दफ़नाया जा रहा है.

इस शहर के 7,000 मुसलमान जुलाई 1995 में आगे बढ़ रहे बोस्नियाई सर्ब सैनिकों के हाथों मारे गए थे.

ये नरसंहार यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे भीषण दमन था.

सर्बिया के राष्ट्रपति बोरिस तादिच भी इस समारोह में शामिल हो रहे हैं और इसे एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

नरसंहार

साल 1992 से 1995 तक हुए बोस्नियाई युद्ध में संयुक्त राष्ट्र ने स्रेब्रेनित्सा को सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया था.

बोस्निया के हज़ारों मुसलमानों ने वहां जाकर शरण ली थी लेकिन बोस्निया की सर्ब सेना ने उस जगह की सुरक्षा कर रही हॉलैंड की सेना पर जल्द ही काबू पा लिया और हज़ारों मुसलमानों को मारकर उन्हें सामूहिक कब्रों में एक साथ दफ़ना दिया.

इस पूरे युद्ध में सिर्फ़ स्रेब्रेनिका के इस कांड को संयुक्त राष्ट्र ने नरसंहार का नाम दिया.

रविवार को हज़ारों लोग इस समारोह में शामिल हुए हैं.

जिन 775 लोगों की पहचान हुई है उनके लिए नई कतारें बनाई गई हैं और उन्हें वहां पहले से दफ़नाए गए 4,000 लोगों के साथ ही दफ़न किया जा रहा है.

भीड़ में शामिल लोगों में 80 साल के हसन माहिच भी हैं. वो अपने दो बेटों को दफ़नाने आए हैं.

Image caption रविवार को दफ़नाए जा रहे लोगों में वो हैं जिनकी अब पहचान हो पाई है.

उनका कहना है, “ काश हम सबको एक साथ ही मार दिया गया होता तो ये दिन तो हमें नहीं देखना पड़ता.”

लेकिन वहां मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन का कहना है कि उस इलाक़े के बहुत से सर्ब नागरिक 1995 की जो तस्वीर पेश की जा रही है उसे मानने से इंकार करते हैं.

उनमें से एक का कहना है, “सर्ब लोगों को मीडिया में ऐसे दर्शाया गया है जैसे वो नरसंहार करने वाले लोग हों लेकिन सच्चाई ये नहीं है.”

उन्होंने कहा कि इस बात से उन्हें इंकार नहीं है कि स्रेब्रेनित्सा में अपराध हुआ लेकिन जो कुल संख्या बताई जा रही है मारे गए लोगों की वो बढ़ा चढ़ाकर बताई गई है.

उनका कहना है कि दुनिया उस युद्ध में मारे गए सर्ब लोगों को भूल गई है.

इस बरसी के मौके पर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि जो लोग इस नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार थे उन्हें हर हाल में सज़ा मिलनी चाहिए.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि ये एक ऐसा अपराध था जिसने यूरोप को शर्मिंदा कर दिया.

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