पाक से बातचीत में शामिल न हों: भाजपा

कृष्णा और क़ुरैशी
Image caption विदेश मंत्रियों की संयुक्त पत्रवार्ता में तनाव साफ़ नज़र आ रहा था

भारत- पाकिस्तान वार्ता के बाद आरोप-प्रत्यारोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत में शामिल ही नहीं होना चाहिए.

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि जब भारतीय विदेश मंत्री ने माना है कि बलूचिस्तान पर भारत को कोई सबूत नहीं दिए गए हैं तो मिस्र के शर्म-अल-शेख में हुई भारत-पाक बातचीत में बलूचिस्तान का मुद्दा क्यों शामिल किया गया?

पूर्व विदेश मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि जिस तरह से 'क़ुरैशी ने एस एम कृष्णा पर कटाक्ष किए वो असभ्य हैं.'

वहीं कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने भी भारतीय गृह सचिव जीके पिल्लई के बारे में विदेश मंत्री क़ुरैशी की टिप्पणी की निंदा की है.

'गृह सचिव चरमपंथी नहीं'

भाजपा ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी की तरफ से गृह सचिव जीके पिल्ले की टिप्पणियों की तुलना लश्कर नेता हाफ़िज़ सईद की कथनी से करने और भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की इस बारे में चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "हाफ़िज़ सईद एक चरमपंथी हैं, जबकि जीके पिल्लई भारत के गृह सचिव हैं, कोई चरमपंथी नहीं."

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि गुरुवार को हुई भारत-पाक बातचीत पर पड़ोसी देश का रवैया काफ़ी निराशाजनक रहा है.

सुषमा स्वराज ने कहा, "भारत को पाकिस्तान से बातचीत में शामिल नहीं होना चाहिए. भारत को हर बार अपमान क्यों सहना चाहिए?"

पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा, "क़ुरैशी विदेश मंत्री बनने के क़ाबिल नहीं हैं."

यशवंत सिन्हा ने ये भी कहा कि जिस तरह से कुरैशी ने एसएम कृष्णा पर कटाक्ष किए और कहा कि वो तैयारी के साथ नहीं आए थे और बातचीत के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली फ़ोन करता रहा, वो असभ्य व्यवहार है और क़ायदे का उल्लंघन है.

सिन्हा ने कहा, "क़ुरैशी ने प्रॉटोकॉल का उल्लंघन किया है. मुझे यक़ीन है कि ये सब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की जानकारी के बिना नहीं हुआ होगा."

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