ऊर्जा की खपत में चीन नंबर एक बना

Image caption पिछले दशक में चीन में ऊर्जा की खपत दोगुनी हो गई है.

एक नई रिपोर्ट के अनुसार चीन अमरीका को पीछे छोड़कर दुनिया में सबसे ज़्यादा ऊर्जा इस्तेमाल करने वाला देश बन गया है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रारंभिक आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले दशक में चीन में बढ़ती जनसंख्या और तेज़ आर्थिक विकास की वजह से ऊर्जा की खपत दोगुनी हो गई है.

साथ ही ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि चीन नंबर एक पर इसलिए भी पहुंच गया है क्योंकि आर्थिक मंदी का उस पर वैसा असर नहीं हुआ जैसा अमरीका पर देखा गया.

चीन ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि उनके आकलन का तरीका विश्वसनीय नहीं है.

आंकड़ों के अनुसार साल 2009 में चीन में ऊर्जा की खपत अमरीका के मुकाबले चार प्रतिशत ज़्यादा थी.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता ऐंड्रयू वाकर का कहना है कि चीन में सबसे ज़्यादा तरक्की उद्दोग और निर्माण क्षेत्र में हुई है और ये दोनों ही भारी ऊर्जा खपत वाले क्षेत्र हैं.

बढ़ता प्रभुत्व

Image caption चीन की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को बढ़ती ऊर्जा खपत के लिए ज़िम्मेदार माना गया है.

ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाते हैं ख़ासकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार में.

लेकिन यहां ये कहना भी ज़रूरी है कि एक आम चीनी नागरिक जितनी ऊर्जा का इस्तेमाल करता है वो एक अमरीकी नागरिक के ऊर्जा इस्तेमाल का पांचवा हिस्सा है.

आमतौर पर ऐसा कम ही होता है कि किसी क्षेत्र में चीन को विश्व में सबसे आगे होने का दर्जा मिले और वो उसे नकार दे लेकिन इस बार चीन इस रिपोर्ट को खारिज कर रहा है.

चीन का कहना है कि इस रिपोर्ट से ये बात ज़ाहिर नहीं होती कि चीन किस तरह से अपने ऊर्जा इस्तेमाल और ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के लिए कदम उठा रहा है.

और शायद यही वजह है कि चीन इस नंबर एक ओहदे को लेकर संवेदनशील है.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ये रिपोर्ट कोई आलोचना नहीं है बल्कि चीन की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए ये ऊर्जा इस्तेमाल जायज़ है.

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