मिस्र ने मध्यस्थ की भूमिका फिर संभाली

हुस्नी मुबारक
Image caption हुस्नी मुबारक फिर बने मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया के मध्यस्थ

मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया को पटरी पर लाने के प्रयासों के तहत रविवार को उच्चस्तरीय बैठकें कर रहे हैं.

इसरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू, फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और मध्यपूर्व के लिए अमरीकी दूत जॉर्ज मिचैल इन बैठकों के लिए काहिरा में मौजूद हैं.

इसरायल और फलस्तीनियों के बीच आमने सामने की सीधी बातचीत की प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए मिस्र फिर से अपनी मध्यस्थ की भूमिका में लौट आया है.

मिस्र के राष्ट्रपति हु्स्नी मुबारक ये जानते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कितने उत्सुक हैं.

उधर इसरायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू भी अपना सहयोग दे रहे हैं.

हालांकि इसरायली और फ़लस्तीनी इस सीधे बातचीत की शर्तों से सहमत नहीं हैं, लेकिन नेतन्याहू को आशा है कि बातचीत से पहले की शर्तों पर दोनों पक्षों में सहमति का कोई न कोई रास्ता निकल ही आएगा.

नेतन्याहू का कहना था, "मैं राष्ट्रपति मुबारक के साथ मुलाकात में ये जानना चाहूंगा कि कैसे फ़लस्तीनियों के साथ जल्द से जल्द सीधे बातचीत शुरू की जा सकती है. मैं जानता हूं कि हमारी तरह मिस्र भी कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है और मुझे उम्मीद है कि वाशिंगटन में राष्ट्रपति ओबामा के साथ मेरी मुलाकात के बाद हम इस साझे लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते भी खोज ही लेंगे."

लेकिन फ़लस्तीनियों को इसरायल के इरादों पर भरोसा नहीं है.

उनका ये मानना है बातचीत से पहले की शर्तों में उन्हें कोई बड़ी रियायत मिलने वाली नहीं है और इसरायल सिर्फ़ अमरीका को ख़ुश करने के लिए बातचीत की मेज़ पर लौटना चाहता है.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने हालांकि इस बातचीत के लिए कुछ दिलचस्पी दिखाई है.

अपनी मिस्र की यात्रा के दौरान अरब देशों का समर्थन हासिल करने की भी उन्हें उम्मीद है.

जहां तक राष्ट्रपति मुबारक का सवाल है, मध्यपूर्व कूटनीति में अपनी व्यस्तता और सक्रियता के बहाने वे अपने स्वास्थ्य को लेकर उड़ी अफ़वाहों को भी झूठा साबित कर सकते हैं.

यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ की विदेश नीति मामलों की प्रमुख कैथरीन ऐशटन ने कहा है कि इसरयाल को ग़ज़ा की नाकेबंदी ख़त्म करके सीमा खोलनी होगी.

उनका कहना था कि केवल नाकेबंदी में ढील देना काफ़ी नहीं है, इसरायल को सीमाएं खोलनी होगी जिससे फ़लस्तीनियों और सामान की ग़ज़ा मे आवाजाही खुले.

क्षेत्र की यात्रा पर गई बैरोनेस ऐशटन में कहा कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया है कि इसके लिए इसरायल पर दबाव डाला जाए.

ग़ज़ा का नियंत्रण संभाल रहे हमास संगठन के प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी ने बौरोनेस ऐशटन के वक्तव्य का स्वागत किया लेकिन कहा कि फ़लस्तीनी केवल लफ़्फ़ाज़ी नहीं बल्कि ठोस क़दम उठते देखना चाहते हैं.

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