'सद्दाम नहीं थे ख़तरा'

बेरोनेस कनिंघम-बुल्लर
Image caption बैरोनेस मनिंघम-बुलेर इराक युद्ध से पहले 'ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी' का हिस्सा थीं.

पूर्व एमआई5 प्रमुख एलिजा़ मैनिंघम-बुलेर ने इराक़ युद्ध की जांच समिति के सामने पेश होकर कहा है कि ‘सद्दाम ख़तरा नहीं थे.’

इराक़ युद्ध में ब्रिटेन की भूमिका के बारे आधिकारिक जांच के दौरान साक्ष्य देते हुए मनिंघम-बुलेर ने कहा कि उनकी एजेंसी का आंकलन था कि इराक़ से ब्रिटेन को बहुत कम ख़तरा था और उनके अनुसार इराक़ के पास ब्रिटेन के विरुद्ध आतंकवादी हमला करने की क्षमता सीमित थी.

बैरोनेस मनिंघम-बुलेर इराक़ युद्ध से पहले सरकार की ‘ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी’ का हिस्सा थीं. इसी समिति ने इराक़ में ‘व्यापक विनाश के हथियार’ होने संबंधी विवादास्पद रिपोर्ट तैयार की थी.

चरमपंथ की ओर

मंगलवार को आधिकारिक जांच के सामने पेश होकर मनिंघम-बुलेर ने कहा कि इराक़ युद्ध में ब्रिटेन के शामिल होने से मुसलमान युवाओं की एक पूरी पीढ़ी का झुकाव चरमपंथ की ओर हुआ जिन्होंने इराक़ पर आक्रमण को इस्लाम पर हमले के रुप में देखा.

मनिंघम-बुलेर ने कहा कि शायद इराक़ युद्ध ने ही अल-क़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन को इराक़ी जेहाद का अवसर दिया है.

ये जांच इस समय दूसरे दौर की सुनवाई कर रही है. इस साल के आख़िर में इस जांच पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी.

बैरोनेस मनिंघम-बुलेर इस जांच में शामिल होने वालीं नौवीं महिला हैं.

उनकी सार्वजनिक गवाही एक दूसरे जासूस सर रिचर्ड डियरलव के विपरीत होगी क्योंकि उन्होंने अपनी गवाही बंद कमरे में दी थी.

ये जांच 2003 में हुए इराक़ युद्ध की छानबीन कर रही है. जांच समिति के सामने लगातार वरिष्ठ रक्षा, कूटनीतिक और सैन्य अधिकारी पेश हो रहे हैं.

वर्ष 2003 से 2009 तक इराक़ में ब्रिटेन के 79 लोग मारे गए थे.

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