फ़ौजों की वापसी अगले साल से: कैमरन

अफ़ग़ानिस्तान
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से ब्रितानी फ़ौजों की वापसी अगले साल से शुरु हो सकती है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वहाँ से अमरीकी फ़ौजों की वापसी जुलाई, 2011 से शुरु होगी.

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने बीबीसी से कहा कि इसी समय ब्रितानी फ़ौजों की वापसी की संभावना है लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि ज़मीनी परिस्थितियाँ कैसी हैं.

लेकिन ब्रितानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल सर माइक जैक्सन ने कहा है कि वे सेना की वापसी के लिए कोई तारीख़ तय करने के पक्ष में नहीं हैं और वहाँ सत्ता के हस्तांतरण की योजना वास्तविकता से काफ़ी दूर है.

प्रधानमंत्री कैमरन ने वॉशिंगटन से यह बात कही है जहाँ उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा से अफ़ग़ानिस्तान के युद्ध पर चर्चा की है.

अफ़ग़ानिस्तान में मंगलवार को हुए एक अहम सम्मेलन में एक योजना को मंज़ूरी दी गई थी जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2014 तक अफ़ग़ान सुरक्षा बल पूरे देश में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाल लेंगे.

2015 तक वापसी

बीबीसी रेडियो पाइव लाइव के मुख्य राजनीतिक संवाददाता जॉन पीनर ने डेविड कैमरन से पूछा कि क्या यह उम्मीद करनी चाहिए कि अगले साल अमरीकी फ़ौजों की वापसी के बाद ही ब्रितानी फ़ौजों की वापसी होगी, तो उन्होंने कहा, "हाँ हम ऐसी उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन यह ज़मीनी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. जितनी जल्दी हम ज़िले और प्रांत अफ़ग़ान नियंत्रण में दे सकेंगे, उतनी ही जल्दी कुछ फ़ौजें वापस बुलाई जा सकेंगीं."

प्रधानमंत्री कैमरन ने कहा, "मैं किसी की उम्मीद बढ़ाना नहीं चाहता क्योंकि फ़ौजों की वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि सुरक्षा की स्थिति में कैसे सुधार होता है."

उनका कहना था, "ब्रितानी जनता को समझना चाहिए कि अगले पाँच साल में यानी 2015 तक वहाँ फ़ौजों के साथ या बड़ी संख्या में सैनिकों के साथ मौजूद नहीं होंगे क्योंकि मेरी राय में यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को एक अंतिम तारीख़ बता दी जाए कि इसके बाद हम वहाँ इस तरह से मौजूद नहीं होगे."

पूर्व सेना प्रमुख सर माइक ने यह कहने से इनकार कर दिया कि कैमरन ने वर्ष 2015 का जो लक्ष्य रखा है उसे हासिल किया जा सकता है या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह 'महत्वाकांक्षी' योजना है.

उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ़ योजना बनाकर काम पूरा नहीं हो जाता. परिस्थितियाँ उस तरह से नहीं भी हो सकती हैं जैसी कि आपने योजना बनाई है."

उनका कहना है कि वे हमेशा ही इस तरह से तारीख़ तय करने से बचते रहे हैं क्योंकि हमेशा ज़मीनी परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए.

सर माइक ने कहा, "कोई तारीख़ तय करने में ख़तरा यह है कि इससे तालिबान को यह मौक़ा मिल सकता है कि वे फिर से संगठित होने के लिए उस तारीख़ का इंतज़ार करते रहें."

उनका कहना है कि अफ़ग़ान लोगों को तब तक हस्तांतरण नहीं किया जा सकता जब तक वे अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं हो जाते.

उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि सुरक्षा की परिस्थितियाँ अनुकूल हैं, तब तक कोई अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की कार्रवाई ख़त्म करने की बात करेगा."

लेकिन प्रधानमंत्री के साथ यात्रा कर रहे बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कैमरन तो पहले ही तय कर चुके हैं कि 2014 तक अफ़ग़ानों को सुरक्षा व्यवस्था सौंप दी जाएगी और 2015 तक फ़ौजों की वापसी हो जाएगी.

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