कोसोवो की आज़ादी 'अवैध नहीं'

कोसोवो का समर्थन
Image caption कोसोवो सरकार का कहना है कि उसकी आज़ादी को अब पलटा नहीं जा सकता

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि कोसोवो की सर्बिया से आज़ादी की घोषणा अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन नहीं है.

हेग स्थित न्यायालय ने सर्बिया की चुनौती पर सुनवाई के बाद ये फ़ैसला सुनाया.

सर्बिया ने कोसोवो की आज़ादी की घोषणा को अपनी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत में गुहार लगाई थी.

कोसोवो के जातीय अल्बेनियाई अल्पसंख्यकों ने नौ साल तक सर्बियाई सेना और अल्बेनियाई अलगववादियों के बीच चले संघर्ष के बाद, 2008 में आज़ादी की घोषणा कर दी थी.

संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देशों में से 69 देशों ने कोसोवो को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी हुई है जिनमें अमरीका, ब्रिटेन, यूरोप के कई देश और उसके पड़ोसी अल्बेनिया और क्रोएशिया शामिल हैं.

लेकिन सर्बिया, रूस, चीन, भारत, स्पेन, ग्रीस,और बोस्निया जैसे कई देश कोसोवो की आज़ादी को मान्यता नहीं देते.

फ़ैसला

संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई के दौरान दस न्यायधीशों ने कोसोवो के पक्ष में फ़ैसला सुनाया और चार ने विरोध में.

न्यायालय को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष हिसाशी ओवाडा ने कहा,"अदालत इस नतीजे पर पहुँची है कि 17 फ़रवरी 2008 को की गई आज़ादी की घोषणा अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन नहीं हैं."

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फ़ैसला वैसे तो बाध्यकारी नहीं है लेकिन उसकी राय के सामने आने के बाद दूसरे देश कोसोवो को मान्यता देने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं.

बेलग्राद स्थित बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के इस फ़ैसले से अलगाववाद का सामना करनेवाले कई देश चिंतित हो सकते हैं.

सर्बिया सरकार ने फ़ैसला आने से पहले कहा भी था यदि अदालत कोसोवो के अलगाव को मान्यता दे देती है तो दुनिया का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं रहेगा.

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