14 साल बाद ईश निंदा के आरोप से बरी

Image caption ईश निंदा कानून के विरोध में प्रदर्शन करते लोग

पाकिस्तान की एक अदालत ने पवित्र ग्रंथ क़ुरान का अनादर करने की दोषी और मानसिक रूप से बीमार एक महिला को रिहा करने का आदेश दिया है.

उन पर वर्ष 1996 में मुस्लिमों के पवित्र धर्मग्रंथ क़ुरान का अनादर करने का आरोप लगा था.

60 वर्षीया ज़ैबुननिसा के ख़िलाफ़ कभी सुनवाई शुरु नहीं हुई न ही उनके रिश्तेदारों ने उसकी गिरफ्तारी का विरोध किया था.

पाकिस्तान के ईश निंदा कानून में पैगंबर हज़रत मोहम्मद या क़ुरान का अपमान करने वालों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है.

मानवाधिकार समूहों ने ऐसी सज़ा को ख़त्म करने के लिए अभियान भी चला रखा है.

गत सोमवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने पाकिस्तानी कोर्ट परिसर में ऐसे दो भाइयों को गोली मार कर हत्या कर दी थी जिन पर ईश निंदा का आरोप था.

जनता का भय

ज़ैबुननिसा के वकील आफ़ताब अहमद बाजवा ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा, "1996 में उनकी गिरफ़्तारी के तुरंत बाद मोडिकल बोर्ड ने ज़ैबुननिसा को मानसिक रूप से बीमार घोषित किया था. लेकिन उन्हें जेल भेज दिया गया."

उनका कहना है, "कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जो उन्हें दोषी प्रमाणित करता हो."

एक पुलिस अधिकारी ने अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा कि तनाव शांत करने के लिए उन्हें गिरफ़्तार किया गया था, लेकिन जब उन्हें जेल भेज दिया गया तब सब इस बात को भूल गए.

उनका कहना है कि शायद लोगों की नाराज़गी के डर से उसके परिजनों ने उसका केस नहीं लड़ा.

पाकिस्तान में ईश निंदा के दोषी और उसके परिवार के सदस्यों अक्सर लोगों की नाराज़गी का शिकार होना पड़ा है या भीड़ ने उन्हें मार डाला है.

इस मामले में लाहौर के एक मौलवी क़ारी हाफिज़ ने पुलिस से शिकायत की थी कि उन्होंने कुरान के पन्नों को नाली में गिरा पाया था.

पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.

हाफ़िज़ ने लाहौर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने जो शिकायत की थी उसमें ज़ैबुननिसा का नाम उन्होंने दर्ज नहीं कराया था.

उनका कहना है कि पुलिस ने अपनी जांच की और उस महिला को गिरफ्तार किया.

बाजवा ने ज़ैबुननिसा को एक साल पहले मनोरोगियों के लिए बने एक जेल से ढूंढ निकाला और उनकी तरफ से लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

बाजवा ने कहा कि उन्हें अब निराश्रित गृह भेज दिया जाएगा.

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