घातक 'क्लस्टर बम' पर लगी रोक

cluster bombs
Image caption ‘क्लस्टर बम’ कई छोटे बमों से मिलकर बनता है.

एक वैश्विक संधि के तहत युद्ध और हमलों के दौरान जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए ‘क्लस्टर बमों’ और समूह में वार करने वाले घातक हथियारों पर रोक लगा दी गई है.

‘क्लस्टर बम’ वो हथियार है जो कई छोटे बमों से मिलकर बनता हैं. एक ही वार में ये बम कई लोगों को निशाना बना सकता है.

इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल को लेकर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ‘क्लस्टर बमों’ के इस्तेमाल, भंडारण और खरीद-फरोख़्त पर पूरी तरह से रोक लगाने का फै़सला किया गया.

सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि इस्तेमाल के दौरान जो बम नहीं फटते और युद्ध ग्रस्त इलाकों में आम नागरिकों के लिए ख़तरा बने रहते हैं उनकी सफ़ाई का ज़िम्मा भी संबंधित देशों को उठाना होगा.

इस संधि पर 108 देशों ने मुहर लगाई है.

द्बितीय विश्व युद्ध के दौरान ‘क्लस्टर बम’ पहली बार इस्तेमाल किए गए. इनका मकसद युद्ध और हमलों के दौरान जानमाल के नुकसान को बढ़ाना था.

ये संधि विश्व स्तर पर हथियारों के इस्तेमाल को कम करने और निरस्त्रीकरण की दिशा में एक ज़रूरी कदम है. बान की मून, संयुक्त राष्ट्र महासचिव

इन बमों पर रोक लगाने की पैरवी कर रहे आंदोलनकर्ताओं ने इस संधि को मानवता की जीत बताया है.

आंदोलनकर्ताओं के संगठन ‘क्लस्टर म्युनिशन कोएलिशन’ (सीएमसी) के संयोजक थॉमस नैश ने कहा, “बेहद घातक और एक अमानवीय हथियार पर ये मानवता और मानवीय मूल्यों की जीत है.’’

नैश का कहना था, “युद्ध के दौरान आम नागरिकों की मौत लगातार इन दिनों खबर का विषय बनती हैं. ऐसे में ये संधि इस बात को साबित करती है कि सरकारों को आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने होंगे.”

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा, “ये संधि विश्व स्तर पर हथियारों के इस्तेमाल को कम करने और निरस्त्रीकरण की दिशा में एक ज़रूरी कदम है. इसके ज़रिए हमें आम लोगों और ख़ासतौर पर बच्चों को होने वाले नुकसान की रोकथाम में मदद मिलेगी.’’

निशाना बनते आम लोग

क्लस्टर बमों को बनाने के लिए बड़ी संख्या में तेज़ और धारदार धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है. ये बम कई सालों तक फटने की दशा में रहते हैं.

युद्ध प्रभावितों के लिए काम करने वाले संगठन 'चैरिटी हैंडिकैप इंटरनेशनल' का अनुमान है कि क्लस्टर बमों का निशाना बनने वाले 98 फ़ीसदी लोग आम नागरिक होते हैं. इनमें एक तिहाई हिस्सा बच्चों का है.

Image caption 2006 में इस्त्रायल ने लेबनान पर 40 लाख से ज़्यादा क्लस्टर बम गिराए.

2006 में इसराइल और लेबनान के हिज़बुल्ला के बीच युद्ध के बाद क्लस्टर बमों पर रोक लगाने की मुहिम तेज़ हो गई. माना जाता है कि युद्ध के आख़िरी तीन दिनों में इसराइल ने लेबनान पर 40 लाख से ज़्यादा क्लस्टर बम गिराए.

अमरीका का विरोध

हालांकि अमरीका, चीन और रूस जैसे दुनिया के कई बड़े देशों जैसे ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

अमरीका का मानना है कि क्लस्टर बम जैसे हथियारों का इस्तेमाल ‘पूरी तरह से कानूनी है’ और ये ‘सैन्य ज़रूरतों के मुताबिक है’.

आंदोलनकर्चाओं का मानना है कि भले ही ताकतवर देश अभी इस संधि में शामिल नहीं है लेकिन ये संधि युद्ध के दौरान घातक हथियारो के इस्तेमाल पर रोक लगाने में मददगार साबित होगी.

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