भारत, चीन को विशेष रियायत नहीं: ब्लैकबेरी

ब्लैकबेरी

जब ब्लैकबेरी मोबाइल को लेकर सुरक्षा के सवाल उठाए जा रहे हैं और सरकारें चिंतित दिख रही हैं, तब मोबाइल कंपनी ने साफ़ कर दिया है कि वह सरकारों को मोबाइल के ज़रिए भेजे जाने वाले संदेशों की निगरानी की अनुमति नहीं दे सकती.

ब्लैकबेरी बनाने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) का कहना है कि मोबाइल संदेशों की निगरानी की अनुमति देने से कंपनी के अपने ग्राहकों के साथ रिश्तों पर आँच आएगी.

उल्लेखनीय है कि सुरक्षा की चिंता की वजह से सऊदी अरब ने ब्लैकबेरी पर रोक लगाने की घोषणा कर दी है जबकि संयुक्त अरब अमीरात ऐसी रोक पर विचार कर रही है.

भारत ने भी आरआईएम से कहा है कि वह संदेशों की निगरानी की व्यवस्था करे लेकिन दूरसंचार राज्यमंत्री सचिन पायलट का कहना है कि अभी तक कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है और जवाब आने के बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा.

कोई रियायत नहीं

यदि आपको इंक्रिप्शन पर प्रतिबंध लगाना हो, तो इसका मतलब है कि आप बड़े औद्योगिक संस्थानों, व्यवसायों, बैंकिंग और इंटरनेट को बंद करना चाहते हैं और यह नहीं होने जा रहा है

माइक लैज़ारिदिस

कनाडा की कंपनी आरआईएम के एक शीर्ष अधिकारी माइक लैज़ारिदिस ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा है कि ब्लैकबेरी के ज़रिए भेजे जा रहे सारे संदेशों पर सरकारों को निगरानी रखने का अधिकार देने से कंपनी के साथ ग्राहकों के संबंधों पर आँच आएगी, जिसमें बड़ी कंपनियाँ और क़ानून व्यवस्था क़ायम रखने वाली कंपनियाँ भी हैं.

उन्होंने कहा, "हम इस पर कोई समझौता नहीं कर सकते क्योंकि इसी ने तो ब्लैकबेरी को दुनिया की नंबर वन कंपनी बनाया है."

लैज़ारिदिस ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि कंपनी ने भारत और चीन सरकार को किसी तरह की कोई रियायत दी है, जहाँ ब्लैकबेरी का उपयोग करने वालों की संख्या बहुत अधिक है.

ऐसी ख़बरों के बारे में उन्होंने कहा, "यह एकदम बेतुका और सरासर ग़लत है."

उनका कहना है कि जिस इंक्रिप्शन को लेकर सरकारों को ऐतराज़ है उसका उपयोग ई-कॉमर्स के लेनदेन, टेलीकॉन्फ़्रेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक मनी ट्रांसफ़र के लिए किया जाता है.

आरआईएम के अधिकारी ने कहा, "यदि आपको इंक्रिप्शन पर प्रतिबंध लगाना हो, तो इसका मतलब है कि आप बड़े औद्योगिक संस्थानों, व्यवसायों, बैंकिंग और इंटरनेट को बंद करना चाहते हैं और यह नहीं होने जा रहा है."

खाड़ी देशों की चिंताओं के बारे में उन्होंने कहा कि वे उनकी चिंताओं से वाकिफ़ हैं लेकिन हर देश को इस तरह की चीज़ों से गुज़रना होता है.

'जवाब का इंतज़ार'

उधर भारत सरकार का कहना है कि उसे अभी आरआईएम से कोई जवाब नहीं मिला है और जवाब मिलने के बाद ही वह कोई फ़ैसला करेगी.

किस देश ने क्या किया इस पर हम टिप्पणी नहीं करना चाहते. भारत एक खुला बाज़ार है और हम चाहते हैं कि सभी कंपनियाँ यहाँ सुविधा के साथ काम करें

सचिन पायलट

दूरसंचार राज्यमंत्री सचिन पायलट ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि गृहमंत्रालय की सलाह पर दूरसंचार मंत्रालय ने ब्लैकबेरी चलाने वाली कंपनी आरआईएम के सामने कुछ सुरक्षा चिंताएँ रखीं थीं.

उनका कहना है कि अभी कंपनी के साथ चर्चा चल रही है और आरआईएम ने औपचारिक रुप से कोई जवाब नहीं दिया है.

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत सरकार भी सऊदी अरब या संयुक्त अरब अमीरात की तरह कोई क़दम उठाएगी, उन्होंने कहा, "किस देश ने क्या किया इस पर हम टिप्पणी नहीं करना चाहते. भारत एक खुला बाज़ार है और हम चाहते हैं कि सभी कंपनियाँ यहाँ सुविधा के साथ काम करें."

उन्होंने भारत को 67 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं का देश बताते हुए कहा, "हम किसी की प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं करना चाहते लेकिन सुरक्षा को लेकर हमें कुछ जानकारियों की ज़रुरत पड़ सकती है."

उन्होंने कहा कि यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि भारत किस तरह के क़दम उठा सकता है.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.