'तूफ़ान में मारे गए थे पर्वतारोही'

एवरेस्ट

इस अध्ययन में 1924 के मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है.

एक ताज़ा रिपोर्ट में पता चला है कि प्रसिद्ध पर्वातारोही जॉर्ज मैलोरी और एंड्रयू इरविन की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के दौरान 1924 में एक तूफ़ान के कारण मौत हो गई थी.

इस नए अध्ययन में इस ऐतिहासिक चढ़ाई के दौरान रिकॉर्ड किए गए मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया.

जॉर्ज मैलोरी और एंड्रयू इरविन को ग़ायब हो जाने से पहले आठ जून 1924 को एवरेस्ट के उत्तर-पूर्वी रिज पर देखा गया था.

ऑक्सीजन की कमी

अध्ययन में कहा गया है कि तूफ़ान के कारण हवा का दबाव गिरने ने पर्वतारोहियों को ऑक्सीजन से वंचित कर दिया था.

यह अध्ययन 'वेदर' जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इसमें 1924 की चढ़ाई के समय मौसम के आँकड़ों का विश्लेषण किया गया है. यह जानकारी लंदन के रॉयल ज्योग्राफ़िकल सोसायटी के पुस्तकालय में लेखक ने दी.

इस चढ़ाई के आंकड़ों की एक तालिका 1926 में प्रकाशित की गई लेकिन जॉर्ज मैलोरी और एंड्रयू इरविन के लापता होने की जानकारी लेने के लिए इनका कभी विश्लेषण नहीं किया गया था.

हम इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि मैलोरी और इरविन जब शिखर की ओर जा रहे थे तो उन्हें एक तीव्र तूफान का सामना करना पड़ा था

प्रोफ़ेसर जीड्ब्लू केंट मूर, अध्ययन के लेखक

शोधकर्ताओं ने बैरोमेट्रिक दबाव मापन के विश्लेषण में पाया कि जब मैलोरी और इरविन चढ़ाई का प्रयास कर रहे थे तो एवरेस्ट के बेस कैंप पर हवा के दबाव में अचानक कमी आ गई थी. यह गिरकर क़रीब 18 मिलीबार (एमबीएमआर) पर पहुँच गया था.

अध्ययन के लेखक और कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जी डब्ल्यू केंट मूर इसका वर्णन करते हुए कहते हैं, ''यह एक काफ़ी बड़ा दबाव था.''

उन्होंने कहा, ''हम इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि मैलोरी और इरविन जब शिखर की ओर जा रहे थे तो उन्हें एक तीव्र तूफ़ान का सामना करना पड़ा था.''

विवाद का जन्म

इन नतीजों पर विवाद पैदा हो सकता है क्योंकि इस बात को लेकर अब भी बहस जारी है कि ये पर्वतारोही ढलान से लापता होने से पहले एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचे थे या नहीं.

प्रोफ़ेसर मूर ने बीबीसी से कहा, ''मुझे लगता है कि ये कहना सही होगा कि तूफ़ान की वजह से ही मैलोरी और इरविन का शिखर पर चढ़ने का प्रयास विफल हुआ होगा.''

टोरंटो के वुमेन कॉलेज अस्पताल के चीफ़ सर्जन डॉक्टर जॉन सिंपल कहते हैं, ''एवरेस्ट बहुत ऊँचा है इसलिए उसके शिखर के पास ज़िंदा रहने लायक ऑक्सीजन कम होती है और दबाव का चार एमबीएआर तक गिर जाना किसी के मरने के लिए काफ़ी है.''

इस अध्ययन के लेखक का मानना है कि हवा का दबाव गिरने और हाइपोक्सियॉ (रक्त में ऑक्सीजन का कम पहुँचना) से इन पर्वतारोहियों की मौत हुई.

मैलोरी और इरविन के पीछे-पीछे एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू करने वाले नोएल ऑडेल ने दोनों को अंतिम बार जीवित देखा था. उनका दावा है कि जिस दिन दोनों लापता हुए उस दिन दोपहर को एक बर्फ़ीला तूफान आया था. कई लेखकों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया क्योंकि ऑडेल का मानना है कि ऐसा बहुत कम समय के लिए हुआ था.

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