अल क़ायदा से सबसे ज़्यादा ख़तरा: अमरीका

Image caption अमरीका ने यमन और अफ़्रीकी देशों में अल क़ायदा के सहयोगी गुटों को बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है.

अमरीका प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान में अल क़ायदा नेतृत्व और यमन-अफ़्रीका में उसके सहयोगियों से अमरीका को सबसे ज़्यादा ख़तरा है.

वैश्विक चरमपंथ पर अपनी सालाना रिपोर्ट में अमरीका ने कहा है कि हालांकि अल क़ायदा को पाकिस्तान में धक्का लगा है लेकिन उसमें जल्द ही संगठित होने की क्षमता है और उसने अन्य गुटों की मदद से अपना विस्तार किया है.

कांग्रेस को दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में जिस तालिबान के ख़िलाफ़ अमरीकी सेना लड़ रही है, उसे अल क़ायदा से आर्थिक मदद और प्रशिक्षण मिल रहा है.

इससे ठीक उलट रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में पिछले एक साल में सुरक्षा संबंधी घटनाओं में कमी आई है और कम नागरिक हताहत हुए हैं.

अल शबाब से ख़तरा

इस बीच अमरीका ने अपने तीन राज्यों में 14 लोगों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोमालिया के चरमपंथी गुट अल शबाब को पैसा और अपनी सेवाएँ दी.

यूगांडा में हाल में हुए हमले के बाद अल शबाब को लेकर अमरीका में चिंता बढ़ रही है.

वर्ष 2008 में अमरीका ने अल शबाब को विदेशी आतंकवादी गुट घोषित किया था. ये गुट कहता आया है कि वो सोमालिया को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता है.

माना जाता है कि अल शबाब ने सोमालियाई मूल के अमरीकियों को प्रशिक्षित किया कि वे सोमालिया में आत्मघाती हमलों में हिस्सा लें. अमरीका को चिंता है कि संगठन वहाँ भी हमला कर सकता है.

अल शबाब 2006 से सोमाली सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रहा है. कहा जाता है कि उसके पास हज़ारों लड़ाके हैं.

पिछले महीने गुट ने कहा था कि वो यूगांडा की राजधानी कम्पाला में फ़ुटबॉल विश्व कप के दौरान हुए दो बम हमलों के लिए ज़िम्मेदार हैं. हमले में 76 लोग मारे गए थे.

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