अफ़ग़ानिस्तान में 10 शव मिले

आईएएम
Image caption इंटरनैशनल असिस्टैंस मिशन सन 1966 से अफ़ग़ानिस्तान में लोगों की आंखों का इलाज कर रहा है

अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शां प्रांत में 8 विदेशियों सहित 10 चिकित्साकर्मियों के शव पाए गए.

अधिकारियों के मुताबिक एक ईसाई चिकित्सा संस्था के लिए काम कर रहे इन चिकित्साकर्मियों की गोली मार कर हत्या की गई है.

मृतकों में 6 अमरीकी, एक ब्रितानी महिला, एक जर्मन व्यक्ति और और दो अफ़ग़ान नागरिक शामिल हैं.

ये सभी शव गुरुवार को बरामद किए गए.

इंटरनैशनल एसिस्टैंस मिशन नाम की मैडिकल चैरिटी के ये चिकित्साकर्मी बदख़्शां के पड़ोसी प्रांत नूरिस्तान में स्थानीय लोगों के लिए नेत्र चिकित्सा शिविर लगाकर काम कर रहे थे और बदख़्शां होते हुए क़ाबुल लौट रहे थे.

उत्तरपूर्वी बदख़्शां प्रांत में इस मैडिकल चैरिटी के चार वाहनों पर फ़ायरिंग हुई, जिसमें ये 10 लोग मारे गए.

एक स्थानीय पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस हमले का उद्देश्य डकैती लगता है.

लेकिन दो चरमपंथी गुटों तालिबान औऱ हिज़्बे इस्लामी ने इस वारदात की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है.

इन गुटों ने हत्या के उद्देश्य के बारे में ये कहा कि वह चिकित्सा दल ईसाई धर्म का प्रचार करता था और बाइबल की प्रतियां लेकर घूमने वाले ये लोग अमरीका के लिए जासूसी करते थे.

तालेबान के एक प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद का कहना था कि उन लोगों के पास से दारी भाषा में अनूदित बाइबल की प्रतियां मिलीं.

उनका कहना था "कल स्थानीय समय के मुताबिक साढे़ तीन बजे हमारे एक गश्ती दल ने विदेशियों के एक दल को रोका वे लोग ईसाई मिशनरी थे और हमने उनकी हत्या कर दी."

लेकिन इंटरनैशनल असिस्टैंस मिशन ने इन दावों को ग़लत और बेबुनियाद बताया है.

चैरिटी के कार्यकारी निदेशक डर्क फ़्रैंस ने बताया कि इलाक़े में काम कर रहे चिकित्सा दल के इन सदस्यों से बुधवार को चैरिटी का अंतिम संपर्क हुआ था.

"दो या ढाई हफ़्ते पहले नेत्र चिकित्सा दल पड़ोसी प्रांत नूरिस्तान गया था. इस दल ने अपना काम भी वहां ख़त्म कर लिया था, जिसके बाद वे वापस क़ाबुल लौट रहे थे. सैटलाइट फ़ोन सेवा के ज़रिए हमारा उनसे रोज़ ही संपर्क होता था. बुधवार की शाम अंतिम बार टीम के प्रमुख टॉम से हमारा संपर्क हुआ था और हमें लगता है कि ये वारदात गुरुवार को हुई होगी."

इंटरनैशनल असिस्टैंस मिशन सन 1966 में अफ़ग़ानिस्तान में लोगों को नेत्र चिकित्सा तथा अन्य रोगों के इलाज की सुविधा मुहैया करवाती रही है. चैरिटी के मुताबिक चिकित्सा दल की सुरक्षा को लेकर वहां कभी कोई ख़तरा महसूस नहीं हुआ था.

इंटरनैशनल असिस्टैंस मिशन के प्रवक्ता का कहना है कि मृतकों के परिवारों को सूचित कर दिया गया है लेकिन अभी तक शवों की औपचारिक पहचान नहीं हो पाई है.

'सुरक्षित' बदख़्शां

ताजिकिस्तान की सीमा से लगता बदख़्शां प्रांत अफ़ग़ानिस्तान के कुछ उन प्रांतों में से है, जहां सन 2001 से पहले तालिबान का नियंत्रण नहीं था जबकि अमरीकी नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान पर हमला हुआ था.

काबुल से बीबीसी संवादादाता क्वैंटिन समरविल के मुताबिक बदख़्शां प्रांत को काफ़ी समय से सुरक्षित इलाक़ा माना जाता रहा है, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों की शिकायतें थीं कि ग्रामीण इलाक़ों में विद्रोहियों की ओर से ख़तरा महसूस किया जा रहा था.

बीबीसी संवाददाता का ये भी कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता कर्मियों पर हमला एक असाधारण बात है.

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