बॉस ने डाँटा, वेबसाइट पर भड़ास निकालो

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption चीन के कुछ लोग फ़ोन कर ग़ुस्सा निकालने की सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं

चीनी वेबसाइट्स के ज़रिए लोगों को अपना ग़ुस्सा निकालने का मौक़ा मिल रहा है. दफ़्तर में काम का तनाव हो या घर में पति-पत्नी के बीच कलेश. चीख़ना चिल्लाना हो तो बस फ़ोन कीजिए.

अंग्रेज़ी में एक कहावत है कि 'बॉस इज़ ऑलवेज़ राइट' यानि आपका बॉस हमेशा सही होता है. आप चाहकर भी उन्हें पलटकर जवाब नहीं दे पाएंगे.

लेकिन चीन में लोग अपनी भड़ास निकाल सकते हैं.

ज़ाहिर है बॉस के मुँह पर नहीं बल्कि कंप्यूटर पर .

चीनी समाचार एजेंसी शिनहुआ के अनुसार चीन में कुछ ऐसी वेबसाइट्स आजकल काफ़ी चर्चा में हैं जो लोगों का ग़ुस्सा शांत करने के लिए उनसे अपशब्द सुनने को भी तैयार हैं. बदले में उन्हें अपनी जेब काफ़ी ढीली करनी पड़ती है.

उदाहरण के तौर पर चीन की एक वेबसाइट को ही ले लीजिए जिसका नाम है ताओबाओ डॉट कॉम.

'आई मा'

इस वेबसाइट के 'सर्च बॉक्स' में ग्राहक अपने मतलब या काम की चीज़ें ढूंढते हैं. वहां पर अगर आप लिखें 'आई मा' तो तुरंत आपके सामने 175 ऐसी साइटों के नाम आ जाएंगे जो आपका तनाव दूर करने या आपकी भड़ास निकालने की सेवा देने का दावा करती हैं. दरअसल चीनी भाषा में 'आई मा' का मतलब होता है डांट खाना.

Image caption कुछ गृहणियाँ अपना दर्द बाँटने के लिए फ़ोन करती हैं जिनके पति ने उन्हें धोखा दिया हो

इन सेवाओं के लिए ये ग्राहकों से एक युआन से लेकर 500 युआन तक वसूलती हैं.

इनमें से सिहाई नाम के एक दुकानदार ने समाचार एजेंसी शिनहुआ को बताया कि ये सेवाएं लोगों किसी भी बात को सुने, यहां तक कि उनके अपशब्द भी सुनने को तैयार रहती हैं.

एक दूसरी साइट है टाइगर जिसने अपनी इन सेवाओं को तीन श्रेणियों में बांटा हुआ है.

पहली सेवा है फ़ोन से भला-बुरा कहने की. ये सबसे महँगी सेवा है जिसके लिए इसका इस्तेमाल करने वाले से पाँच मिनट के लिए 20 युआन वसूल लिए जाते हैं.

इसमें टेलीफ़ोन करने का बिल अलग होता है. यहां तक कि लोगों को ये विकल्प भी दिया जाता है कि वो किसके ऊपर अपनी भड़ास निकालना चाहते हैं, महिला पर या किसी पुरुष पर.

हालांकि टाइगर ने माना, "ज़्यादा लंबे समय तक किसी को कोसना या अपशब्द कहना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता इसलिए हम अपने ग्राहकों को ये बात साफ़ कह देते हैं कि वो एक दिन में सिर्फ़ तीन बार ही हमारी सेवाएं ले सकते हैं."

टाइगर का कहना कि उनके ज़्यादातर ग्राहक ऊँचे पदों पर काम करने वाले अधिकारी ही होते हैं लेकिन कभीकभार कुछ गृहणियाँ भी उन्हें फ़ोन करती हैं.

ये गृहणियाँ अक्सर वो होती हैं जिन्हें अपने पति की बेवफ़ाई के बारे में जानकारी मिलती है और वो फ़ोन करके अपना दर्द बयान करना चाहती हैं.

उन्होंने कहा, "हमारी सेवा का इस्तेमाल करने वाले अक्सर 20 से 30 साल की उम्र के बीच के लोग होते हैं. इसमें 60 फ़ीसदी पुरुष और 40 फ़ीसदी महिलाएं होती हैं."

बेवफ़ाई

एक ऐसी ही वेबसाइट से जुड़े ली ने कहा, "मेरे ज़्यादातर ग्राहक वो होते हैं जो सिर्फ़ अपने काम का दबाव गुस्से के रूप में निकालते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि ये लोग अजनबियों के साथ ज़्यादा खुल पाते हैं और इसलिए अपने किसी दोस्त, जानकार या रिश्तेदार से ये सब बातें नहीं कह पाते हैं."

आनहुई मेडिकल यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर ज़ैंग होंगबो ने समाचार एजेंसी शिनहुआ को बताया कि इस तरह की सेवाओं के बढ़ने और सफल होने से ये बात समझ आती है कि चीन के लोग तनाव में अपनी ज़िंदगी बिता रहे हैं और इसकी वजह इस देश में काउंसलिंग यानि सलाह देने वाली संस्थाओं की कमी का होना है.

उल्लेखनीय है कि बीजिंग में जुलाई, 2007 में डार्क रेस्तरां के खोले जाने पर काफ़ी बवाल हुआ था.

इस रेस्तरां में तीन ख़ास तरह के कमरे बनाए गए थे जिनमें रेस्तरां के मेहमान दीवार पर बनाई गई किसी व्यक्ति की छाया पर प्लेट मारकर अपना ग़ुस्सा निकाल सकते थे.

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