किशोर लड़ाके के ख़िलाफ़ सुनवाई

ग्वांतानामो बे
Image caption ग्वांतानामो बे मे में बड़ी संख्या में लोग बंद हैं जिनके ख़िलाफ़ आतंकवाद के गंभीर आरोप हैं.

ग्वांतानामो बे जेल में बंद एक पूर्व किशोर लड़ाके के ख़िलाफ़ सुनवाई शुरु हो गई है. राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में यह पहली सुनवाई होगी.

कनाडा के निवासी उमर कादर को आठ साल पहले यानी 2002 में जब अफ़गानिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था तो उसकी उम्र मात्र 15 वर्ष थी.

कादर पर एक संघर्ष के दौरान हथगोले फेंकने का आरोप है. आरोपों के अनुसार कादर के के फेंके हथगोलों से एक अमरीकी सैनिक की मौत हो गई थी.

कादर ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस हत्या का आरोप कबूलने के लिए प्रताड़ित किया गया था.

सैन्य संघर्ष में बच्चों के लिए नियुक्त संयुक्त राष्ट्र की दूत राधिका कुमारस्वामी का कहना है कि यह सुनवाई दुनिया भर में किशोर सैनिकों के लिए एक ख़तरनाक मिसाल कायम करेगी.

कादर के मामले की सुनवाई अमरीका के एक सैन्य आयोग के समक्ष हो रही है.

राष्ट्रपति ओबामा ने वादा किया था कि वो इस साल जनवरी महीने में ग्वांतानामो बे को बंद कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका है.

कादर के ख़िलाफ़ सुनवाई ग्वांतानामो बे और इसे बंद करने में राष्ट्रपति ओबामा की असफलता को और उजागर करेगी.

राधिका कुमारस्वामी का कहना है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कभी किसी नाबालिग सैनिक के ख़िलाफ़ मामला नहीं चलाया गया है.

उनका कहना था, ‘‘ नाबालिग बच्चों के मामले में न्याय के मानक अत्यंत स्पष्ट हैं. उनके ख़िलाफ़ सैन्य ट्राइब्यूनल में मामला नहीं चलाया जाता है.’’

हालांकि सैन्य आयोग के सदस्यों का कहना है कि उन्हें कादर के ख़िलाफ़ मामला चलाने में कोई समस्या नहीं दिखती.

अभियोजक जैफ ग्रोहैरिंग का कहना था, ‘‘ क्या कोई यह बात मानेगा कि किशोरों के ख़िलाफ़ गंभीर अपराधों के लिए मामला नहीं चलना चाहिए. क्या सिर्फ़ इसलिए न्याय के मानदंड अलग होने चाहिए क्योंकि वो अपराध करने के दौरान 15 साल का था.’’

इस मामले में बुधवार से बहस शुरु होगी और कम से कम तीन हफ़्तों में सुनवाई पूरी हो जाएगी.

अभियोजकों का कहना है कि कादर अल क़ायदा के चरमपंथी हैं और कादर ने पूर्वी अफ़गानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की विशेष यूनिट पर उस समय हमला किया जब सैन्य यूनिट ने अल क़ायदा के एक ठिकाने पर छापा मारा. इस संघर्ष में सार्जेंट क्रिस्टोफर स्पीयर की मौत हो गई थी.

दूसरी तरफ बचाव पक्ष का कहना है कि कादर स्वयं अल क़ायदा के मारे हुए हैं और उन्हें ओसामा बिन लादेन से करीबी संबंध रखने वाले एक परिवार ने ज़बर्दस्ती युद्ध में झोंक दिया था.

अमरीका का कहना है कि कादर के पिता अहमद सईद कादिर अल क़ायदा के फाइनेंसर थे जो पाकिस्तान में 2003 में गोलीबारी की घटना में मारे गए थे.

कनाडा के वकील डेनिस एडनी कहते हैं कि कादर तालिबान लड़ाका नहीं है बल्कि परिस्थितियों का मारा बच्चा है.

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