'चीन गुपचुप बढ़ा रहा है फ़ौजी ताक़त'

Image caption चीन का रक्षा बजट आज 77.9 अरब डॉलर का है.

अमरीकी रक्षा विभाग का कहना है कि चीन ने गुप्त तरीके से अपनी फ़ौजी ताक़त बढ़ा ली है और इससे “ग़लतफ़हमी पैदा हो सकती है और ग़लत फ़ैसले हो सकते हैं.”

अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन ने संसद को दी जानेवाली अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि चीन अपनी ज़मीन से मार करने वाली मिसाइलों को बेहतर कर रहा है, अपनी पनडुब्बी ताक़त को बढ़ा रहा है और अपने परमाणु हथियारों में भी बढ़ोतरी कर रहा है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि चीन ने ताइवान के मुक़ाबले अपनी सैनिक शक्ति में और इज़ाफ़ा कर लिया है.

ये रिपोर्ट चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति से संबंधित अमरीकी चिंताओं की पुष्टि करता है.

रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास कम दूरी तक मार करनेवाले 1,150 बैलिस्टिक मिसाइल हैं और बड़ी तादाद में मध्यम दूरी तक मार करनेवाले मिसाइल भी हैं.

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन ने अपने सैन्य कार्यक्रम में अरबों डॉलर खर्च किए हैं और इनमें से ज़्यादातर गुप्त रूप से हुआ है.

इसमें कहा गया है, “चीन की फ़ौजी और सुरक्षा मामलों में पारदर्शिता की कमी से अनिश्चितता बढ़ती है और ग़लतफ़हमी और ग़लत फ़ैसलों का माहौल बनता है.”

हाल के दिनों में चीन के फ़ौजी तंत्र की ओर से अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा सैनिक अभ्यासों की आलोचना हुई है.

इन बयानों में अमरीका पर चीन के मूलभूत हितों की “घेराबंदी” का आरोप लगा है.

अमरीका ने हाल ही में वियतनाम के साथ भी साझा सैनिक अभ्यास किया है और चीन इन गतिविधियों की आलोचना करता रहा है.

Image caption रिपोर्ट के अनुसार चीन अपनी सैन्य पहुंच अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक बढ़ा रहा है.

अमरीका दक्षिण कोरिया के साथ साझा सैनिक अभ्यास का एक नया दौर भी शुरू कर रहा है और उसका कहना है कि इसका उद्देश्य पूरी तरह से रक्षात्मक है.

अमरीका और चीनी सेनाओं के बीच संपर्क ख़त्म हो गए हैं और हाल ही में चीन ने अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स से मिलने से इंकार कर दिया.

पेंटागॉन की रिपोर्ट के अनुसार चीन अपनी फ़ौजी ताक़त की पहुंच को अपनी सीमाओं और ताइवान से कहीं आगे तक बढ़ा रहा है.

चीन ने इस मार्च में अपना सैनिक बजट 77.9 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एलान किया था.

अमरीका का सैनिक बजट 700 अरब डॉलर का है.

पेंटागॉन का कहना है कि वो चीन से बातचीत करना चाहते हैं जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच कोई “ग़लतफ़हमी” नहीं पैदा हो जाए.

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