पाँच में से एक का मानना ओबामा मुसलमान हैं

बराक ओबामा
Image caption राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ग्राउंड ज़ीरो के क़रीब मस्जिद की हिमायत की.

एक शोध के मुताबिक अमरीका में उन लोगों की संख्या बढ़ रही है जिनका मानना है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा मुसलमान हैं.

तीन हज़ार से ज़्यादा अमरीकियों के बीच किए गए प्यू रिसर्च सर्वे में 18 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वे राष्ट्रपति को मुसलमान समझते हैं जबकि मार्च, 2009 में केवल 11 फ़ीसदी लोग ऐसा मानते थे.

विरोधी पार्टी रिपब्लिकन के 34 प्रतिशत सदस्य उन्हें मुसलमान समझते हैं जबकि सर्वेक्षण में शामिल केवल एक तिहाई सदस्यों ने सही पहचाना कि ओबामा ईसाई धर्म को मानते हैं.

यह सर्वेक्षण 13 अगस्त से पहले हुआ था जब ओबामा ने ग्राउंड ज़ीरो पर इस्लामी केंद्र बनाने के मुसमलानों के अधिकार की हिमायत की थी.

सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 43 प्रतिशत लोगों ने इस बात से अनभिज्ञता जताई कि राष्ट्रपति ओबामा किस धर्म को मानते हैं.

व्हाइट हाउज़ ने इस तरह की ग़लत धारणा के लिए राष्ट्रपति के राजनीतिक विरोधियों के 'कुप्रचार' को ज़िम्मेदार ठहराया. व्हाइट हाउज़ के आस्था सलाहकार जोशुआ डुबॉयज़ ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा, "राष्ट्रपति बहुत निष्ठा के साथ अपने ईसाई धर्म का पालन करते हैं लेकिन ज़ाहिर है कुछ ऐसे लोग हैं जो उनके मूल्यों और आस्था के प्रति झूठी बातें फैला रहे हैं".

मुसलमान मानने वाले अंसतुष्ट

सर्वेक्षण में कुछ ऐसी बातें भी सामने आईं कि जो लोग उन्हें मुसलमान समझते हैं वे उनके काम से काफ़ी हद तक अंसतुष्ट हैं जबकि उन्हें ईसाई मानने वाले उनसे ख़ुश हैं.

सर्वेक्षण के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई अमरीकी मुसलमान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ईद इस बार 11 सितंबर को पड़ रही है और उस समय 2001 के आतंकवादी हमलों की याद में उन्हें निशाना बनाया जा सकता है.

कुछ को यह चिंता है कि इस त्योहार को हर्षोल्लास से मनाने का मतलब यह निकाला जाएगा कि मुसलमान हमले की बरसी का जश्न मना रहे हैं.

इस बीच न्यूयॉर्क में ग्राउंड ज़ीरो के क़रीब एक मस्जिद और इस्लामी केंद्र बनाने के मामले पर एक राष्ट्रीय बहस जारी है.

बड़े पैमाने पर अमरीकी इसका विरोध कर रहे हैं जबकि राष्ट्रपति ओबामा, न्यूयॉर्क के मेयर माइकेल ब्लूमबर्ग, अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष और कुछ अन्य ने इसकी हिमायत की है.

ओबामा ने कहा था, "मुसलमानों को अपने मज़हब का पालन करने का उतना ही हक़ है जितना इस देश के अन्य लोगों को".

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