ईरानी परमाणु संयंत्र में ईंधन भरने का काम शुरु

ईरान का परमाणु संयंत्र
Image caption परमाणु संयंत्र का निर्माण 1974 में शुरु हुआ था

ईरान का पहला परमाणु संयंत्र शनिवार को शुरु होने जा रहा है. ईरानी और रूसी अधिकारियों की उपस्थिति में इस संयंत्र में पहली बार ईंधन भरा जा रहा है.

दक्षिणी ईरान के बुशहर में स्थित इस संयंत्र से दो या तीन महीने में बिजली पैदा होनी शुरु हो जाएगी.

पूरे ईरान में इस अवसर पर समारोहों का आयोजन किया गया है और ईरान इसे अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में मील का पत्थर बता रहा है

बुशहर संयंत्र को तैयार होने में 35 वर्षों का समय लगा है और विभिन्न कारणों से इसमें बहुत विलंब हुआ है.

रूस से यूरेनियम आपूर्ति

इस संयंत्र को रूस संचालित करेगा. वही इसके लिए ईंधन की आपूर्ति करेगा और उपयोग के बाद परमाणु कचरे को वापस ले जाएगा.

ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र ईरान पर चार बार प्रतिबंध लगा चुका है.

अमरीका और कई पश्चिमी देशों को लगता है कि ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है जबकि ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

बीबीसी के जॉन लीन का कहना है कि ईरानी अधिकारियों ने संयंत्र की शुरुआत को इस्लामिक गणतंत्र की दुश्मनों पर जीत की तरह प्रस्तुत किया है.

कम संवर्धित यूरेनियम

स्कॉटलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट एंड्र्यूस में ईरान मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर अली अंसारी का कहना है कि इस बात की संभावना है कि ईरान बुशहर के संयंत्र के उदघाटन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करे.

उनका कहना है, "यह शुरुआत ज़रुर तामझाम के साथ होगी लेकिन यह बिजली घर बहुत पुराने मॉडल का है और यह देश को बहुत कम बिजली दे पाएगा."

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिजलीघर लगभग एक महीने बाद बिजली पैदा करने लगेगा.

उनका कहना है कि इसमें उपयोग में आने वाला यूरेनियम परमाणु हथियार बनाने में उपयोग में आने वाले यूरेनियम की तुलना में बहुत कम संवर्धित है.

परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को 90 प्रतिशत से अधिक संवर्धित करना पड़ता है जबकि बुशहर में उपयोग में आने वाला यूरेनियम 3.5 प्रतिशत तक ही संवर्धित है.

इस संयंत्र के लिए रूस यूरेनियम की आपूर्ति कर रहा है हालांकि ईरान ख़ुद भी अब यूरेनियम संवर्धन का काम शुरु कर चुका है.

अब वह यूरेनियम संवर्धन का एक नया कार्यक्रम शुरु करने जा रहा है जिससे कि वह चिकित्सा संबंधी ज़रुरतों के लिए यूरेनियम को 20 प्रतिशत तक संवर्धित कर सके.

इस कार्यक्रम ने इसराइल और पश्चिमी देशों को एक बार फिर चौकस कर दिया है.

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