भारत-जापान के बीच परमाणु सहयोग

भाभा परमाणु संयंत्र
Image caption भारत का परमाणु ऊर्जा बाज़ार कोई 150 अरब डॉलर का बताया जाता है

भारत और जापान के विदेश मंत्रियों के बीच असैनिक परमाणु सहयोग समझौते पर बातचीत हुई है.

जापान के विदेश मंत्री कत्सूया ओकाडा ने कहा कि बातचीत शुरु करने का निर्णय जापान के लिए बड़ा ही कठिन था.

नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए ओकाडा ने कहा कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करेगा तो जापान यह सहयोग बंद कर देगा.

जापान भारत के साथ परमाणु सहयोग समझौता करने से इसलिए हिचकिचाता रहा है क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ओकाडा ने अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ बातचीत की.

उनके भारत आगमन से एक दिन पहले ही भारत के मंत्रिमंडल ने परमाणु उत्तरदायित्व विधेयक को स्वीकृति दी थी जिससे विदेशी कम्पनियों के लिए भारत में परमाणु भट्टी बनाने का रास्ता आसान हो जाएगा.

भारत का परमाणु ऊर्जा बाज़ार कोई 150 अरब डॉलर का बताया जाता है.

सहयोग की मुश्किलें

भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया था लेकिन परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तब से भारत परमाणु व्यापार प्रतिबंध झेलता रहा है.

लेकिन जब 2008 में भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु सहयोग का समझौता हुआ तो 45 देशों वाले परमाणु सप्लायर समूह ने तीन दशकों पुराने इस प्रतिबंध को हटा दिया.

भारत में ऊर्जा की भारी कमी है और खपत दिन पर दिन बढ़ती जा रही है इसलिए वो चाहता है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाए जाएं.

रूसी और फ़्रांसीसी कम्पनियों को ठेके मिल चुके हैं और अब अमरीकी और जापानी कम्पनियां भी इस बाज़ार का लाभ उठाना चाहती हैं.

जापान भारत में निवेश करने वाला छठा सबसे बड़ा निवेशक देश है. पिछले साल दोनों देशों के बीच 12 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था.

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