गुफ़ा में मिले 64 हज़ार साल पुराने तीर

तीर के सिरे
Image caption दक्षिण अफ्रीका की सिबुडु गुफा में तलछट की परतों की खुदाई में ये तीर मिले.

दक्षिण अफ़्रीक़ा के शोधकर्तओं ने इंसान द्वारा बनाए गए क़रीब 64 हज़ार साल पुराने तीरों का पता लगाया है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तीरों का वह हिस्सा हो सकता है जो कि नुकीला होता है.

इन प्राचीन हथियारों की बारीकी से जाँच करने पर उन पर माँस और ख़ून के अवशेष पाए गए. इससे यह पता लगाया जा सकता है कि इनका उपयोग कैसे किया गया.

वैज्ञानिकों का यह शोध 'एंटिक्यूटी' नाम की एक शोध पत्रिका (जर्नल) में प्रकाशित किया गया है.

गुफा की खुदाई

वैज्ञानिकों को तीर के ये सिर दक्षिण अफ़्रीक़ा की सिबुडु गुफ़ा में तलछट की परतों की हुए खुदाई के दौरान मिले. ये वहाँ क़रीब 10 हज़ार साल से दबे पड़े थे.

इस अध्ययन की प्रमुख और जोहानसबर्ग विश्वविद्यालय की प्राध्यापक मारलिज़ लैंबार्ड और उनकी टीम ने इस दिष्ट्रीकोण को पाषाणकालीन विधि विज्ञान के रूप में लिया.

उन्होंने बीबीसी से कहा,''हम इन सिरों को खुदाई स्थल से प्लास्टिक की थैलियों में भरकर प्रयोगशाला में ले आए.''

वे कहती हैं,'' इसके बाद मैंने उनका सूक्ष्मदर्शी की मदद से विश्लेषण का थका देने वाला काम शुरू किया.इस दौरान हमने उनपर माँस और ख़ून के वितरण का पैटर्न देखा.''

इन छोटे ज्यामितिय टुकड़ों के आकार के आधार पर डॉक्टर लैंबार्ड यह देखने में सफल रहीं कि उन्होंने नुक़सान कहाँ पहुँचाया था और उसका प्रभाव क्या था.

इससे यह भी पता चला कि ये टुकड़े किसी तेज़ धार वाले भाले की नोंक की जगह फेंकी गई वस्तु का नुकिला हिस्सा है.

तीरों के इन सिरों पर गोंद भी लगी हुई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि पेड़ से निकली गोंद का इस्तेमाल इन टुकड़ों को तीर से चिपकाने के लिए हुआ था.

इंसानी दीमाग

डॉक्टर लैंबार्ड कहती हैं,'' गोंद का पाया जाना यह बताता है कि उस समय लोग अलग-अलग तत्वों को गोंद की सहायता से चिपकाकर एक मिश्रित उपकरण बनाने में सक्षम थे.''

वैज्ञानिकों की यह खोज तीर-धनुष के विकास को क़रीब 20 हज़ार साल और पीछे ले जाती है.

शोधकर्ताओं की तीर-धनुष के इन शुरुआती साक्ष्यों में काफी रुचि हैं, इस तरह की हथियार तकनीकी से उस समय के इंसान की संज्ञानात्मक क्षमता का पता चलता है.

शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में लिखा हैं,'' तीर-धनुष के साथ शिकार करने के लिए एक बहु स्तरीय योजना, सामान जुटाने, हथियार बनाने और संचार क्षमता की ज़रूरत होती हैं''

लंदन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के प्रोफ़ेसर क्रिस स्ट्रिंजर कहते हैं,'' इस खोज से इस विचार को बल मिला है कि अफ़्रीका के आधुनिक मानव ने 60 हज़ार साल पहले ही नए तरीक़े से शिकार करना शुरू कर दिया था.''

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