कांगो पर सख़्त क़दम उठाने की मांग

कांगो
Image caption संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2010 में अब तक 3500 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्ष्रा परिषद ने मांग की है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में कुछ दिन पहले हुए 154 महिलाओं के सामूहिक बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव क़दम उठाए जाने चाहिए.

कांगो में 150 से ज़्यादा महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार की ख़बर सामने आने के बाद उस पर विचार विमर्श करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक हुई.

बलात्कार की ये घटना कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शिविर से ठीक 30 किलोमीटर की दूरी पर हुई थी.

शांति सेना की आलोचना

आपात बैठक के बाद सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने कहा कि शांति सेना का शिविर पीड़ित गांव के क़रीब था, इससे साफ़ है कि शांति सेना ने गांववालों को बचाने के लिए कोई प्रभावकारी क़दम नहीं उठाया.

सुरक्षा परिषद ने कांगो सरकार से दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा देने की मांग की.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि कांगो सरकार को घटना की पूरी जांच करवानी चाहिए थी.

सुरक्षा परिषद की बैठक में मौजूद सदस्य जानना चाहते थे कि आख़िर उस इलाक़े में विद्रोहियों के सक्रिय होने की ख़बर मिलने के बावजूद भी शांति सेना ने कोई कार्रवाई क्यो नहीं की और उनका तालमेल इतना ख़राब क्यों था.

शांति सेना शिविर से सटे लुवुंगी गांव को विद्रोहियों ने घेर लिया और लगातार तीन-चार दिनों तक महिलाओं और बच्चों के साथ यौन हिंसा करते रहे.

बान की मून ने इस घटना की जाँच के लिए अपना एक विशेष दूत कांगो भेजा है.

बान ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों से हिंसा प्रभावित पूर्वी कांगो में शांति बहाल करने के लिए भरपूर प्रयास करने को कहा, साथ ही उन्होंने विद्रोहियों से हिंसा का त्याग देने की अपील की.

बान ने ये भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवधिकार के उल्लंघन की इस तरह की घटना से नागरिकों को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र को और ज़्यादा क़दम उठाने की ज़रुरत है.

उन्होंने कहा कि कांगो में शांति सेना अपने अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत एक अत्यधिक मुश्किल परिस्थिति में सीमित संसाधनों के साथ जितना कर सकती है कर रही है. लेकिन ऐसे समय में हमें हमेशा ये पूछना चाहिए की क्या हम कुछ और ज्यादा कर सकते थे.

शांति सेना की चुनौती

उधर कोंगो में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के प्रमुख रॉजर मिसे का कहना है कि हांलाकि उनका गश्तीदल उस गांव से दो बार गुज़रा था,फिर भी गाँववालों ने उन्हें कुछ भी नहीं बताया और बड़े स्तर पर हुई बलात्कार की इस घटना का पता उन्हें घटना के दस दिन बाद ही चला.

रॉजर मिसे ने कहा कि घटना के समय वो शिविर में मौजूद नहीं थे लेकिन वो जानते हैं कि अगर सैनिकों को इसकी जानकारी होती तो वो ज़रूर इसमें दख़ल देते.

सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष विटाली चर्कीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ख़ुद अपनी जांच करवाएगी कि आख़िर गंलती कहां हुई.

इस घटना के लिए एफ़डीएलआर नामक विद्रोही गुट को ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

लेकिन इस गुट के कार्यकारी सचिव कैलिक्सटे मबारुशिमाना ने पेरिस से एक बयान जारी कर कहा है कि उनका गुट इसमें किसी भी तरह से शामिल नहीं है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव उनपर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

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