ज्वालामुखी: हज़ारों शिविरों में

Image caption इंडोनेशिया में फटे ज्वालामुखी से प्रभावित लोग अपने इलाक़े छोड़कर जा रहे हैं

उत्तरी सुमात्रा में चार सौ साल बाद फटे ज्वालामुखी की वजह से इंडोनेशिया में कई लोग अस्थाई शिविरों में रात गुज़ार रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि मेदान के पास माउंट सिनाबुंग की ढलान और उसके आसपास के इलाक़े से लगभग 19 हज़ार लोगों को हटा लिया गया है.

ज्वालामुखी के फटने से इन इलाकों में बसे गाँवों और खेतों में धुआँ और धूल फैला हुआ है.

श्वांस की समस्या से कम से कम एक व्यक्ति के मरने की ख़बर भी आई है.

जब ज्वालामुखी शांत हुआ तो कुछ लोग अपने घरों को वापस भी आ गए हैं.

सिनाबुंग ज्वालामुखी से धुआं और राख निकल रही है और ये वायुमंडल के हज़ारों मीटर में फैल गई है.

इंडोनेशिया के ज्वालामुखी केंद्र के वैज्ञानिकों ने पहले कहा था कि ज्वालामुखी फटने की वजह बारिश थी लेकिन अब उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि चट्टानों और ठोस पदार्थों के पिघलने से ज्वालामुखी फटा है.

इंडोनेशिया पृथ्वी के ऐसे स्थान पर है जहाँ ज्वालामुखी और भूकंप की हमेशा आशंका रहती है.

उल्लेखनीय है कि ज्वालामुखी पृथ्वी के सतह पर उपस्थित होते हैं जिनसे पृथ्वी के भीतर का गर्म लावा, गैस और राख बाहर आते हैं.

अक्सर ज्वालामुखी पहाड़ के रूप मे होते हैं और ये विस्फोट के साथ फटते हैं.

वैज्ञानिक अब भी निश्चित रूप से बता पाने में असमर्थ हैं कि ज्वालामुखी कब फटेगा और विस्फोट कितना शक्तिशाली होगा.

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