समलैंगिकों से भेदभाव हुआ: कास्त्रो

फ़िदेल कास्त्रो
Image caption फ़िदेल कास्त्रो लगभग 50 वर्षों तक क्यूबा का नेतृत्व करते रहे

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फ़िदेल कास्त्रो ने कहा है कि 1959 में हुई क्रांति के बाद देश में समलैंगिकों का जो उत्पीड़न हुआ, उसके लिए आख़िरकार वे ही ज़िम्मेदार हैं.

एक मैक्सिकन अख़बार से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि एक समय ऐसा था जब समलैंगिक समुदाय के साथ बहुत अन्याय हुआ.

उन्होंने कहा, "यदि कोई ज़िम्मेदार है तो मैं हूँ."

1960 और 70 के दशक में क्यूबा में बहुत से समलैंगिकों को गोली मार दी गई, जेल भिजवा दिया गया या फिर पुनर्शिक्षा-कैंपों में भेज दिया गया.

फ़िदेल कास्त्रो ने कहा है कि क्यूबा में समलैंगिक परंपरागत रुप से उसी तरह से भेदभाव के शिकार होते रहे जिस तरह से काले लोग और महिलाएं होती रहीं.

उन्होंने स्वीकार किया कि समलैंगिक समुदाय के साथ जो कुछ घट रहा था, उसके प्रति वे ध्यान नहीं दे सके.

84 वर्षीय कम्युनिस्ट नेता ने कहा, "उस समय योजनाबद्ध तरीक़े से हमारे ख़िलाफ़ तोड़फोड़ की कार्रवाई हो रही थी, हथियारबंद हमले हो रहे थे. वह बहुत कठिन समय था."

उन्होंने कहा, "सीआईए बहुत से विद्रोहियों को पैसे दे रहा था और उससे आगे बने रहना कठिन था."

क्यूबा में 1979 में समलैंगिकता को अपराध की सूची से हटा दिया गया और हाल के दिनों में समलैंगिक संगठनों को वैधानिकता दिलवाने की कोशिशें हो रही हैं.

अख़बार के साथ कास्त्रो के बातचीत की यह दूसरी किस्त है.

इससे पहले सोमवार को उन्होंने कहा था कि वे 'मौत के दरवाज़े' पर थे इसीलिए उन्होंने क्यूबा के नेता पद से हटने का फ़ैसला किया.

वर्ष 2006 में बीमार पड़ने के बाद वर्ष 2008 में उन्होंने अपनी सत्ता राउल को सौंप दी थी.

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